
कस्बाथाना. वैसे तो राज्य सरकार ने प्रदूषण के प्रभाव को रोकने के लिए पराली जलाने पर प्रतिबंध लगा दिया है। किसानों को जागरुक भी किया जा रहा है। परंतु किसानों की लापरवाही पराली जलाने में कम नहीं हो रही। जिले भर के कई गांव में इस तरह की घटनाएं घट चुकी हैं। इस वजह से किसानों के सपने भी जलकर राख हो रहे हैं। किसान फसल काटने के बाद नरवाई में आग लगा रहे हैं। इस समय शाम को चारों ओर आग जलती हुई और धुआं उठता दिखाई देता है। प्रतिबंध के बावजूद नरवाई जलाई जा रही है। दिन हो या रात किसी भी समय खेतों में आग की लपटें उठती हुई दिखती हैं। सहायक कृषि अधिकारी राजकुमार मेहता ने बताया कि आग लगाने पर जुर्माने का प्रावधान है।
किसानों पर पर संकट
क्षेत्र में गेहूं, सरसों की फसल की कटाई के बाद नौलाइयों में किसान आग लगा रहे हैं। लेकिन कुछ किसानों की फसल खेतों में डली रहती है। इससे कहीं बार आग की लपटें पास के खेतों में फैल जाती है। इससे अन्य किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है, लेकिन किसानों की इस लापरवाही को प्रशासन अनदेखा कर रहा है।
आग पर काबू पाया
छबड़ा. कृषि उपज मंडी व भीलवाड़ानीचा, गोडिय़ामेहर, घट्टा, खेड़ली गांव में कटे हुए गेहूं में आग लगने की सूचना पर मौके पर पहुंचे दमकल कर्मियों ने बढ़ती आग पर काबू पाया। समीप के भूसे के ढ़ेरों को सुरक्षित बचाया। इस अवसर पर सत्यप्रकाश मेघवाल, नरेश सांखला, जितेंद्र, धनराज महावर, बिट्टू आदि मौजूद थे।
आग से अमरूद के 150 पौधे खाक
पलायथा . यहां शुक्रवार शाम राष्ट्रीय राजमार्ग 27 के निकट दो किसानों के अमरूदों के बाग जल कर राख हो गए। अन्य कृषकों की लगभग तीन सौ बीघा की नौलाई भी जल कर भस्म हो गई। जानकारी अनुसार कृषक रामस्वरूप नागर के 90 पौधों और हेमराज नागर के 60 पौधे के अमरूदों के बाग में आग लग गई। इसको बुझाने के भी अनेक प्रयास किए, लेकिन दमकल पहुंचने से पूर्व ही सारे पौधे झुलस कर खत्म हो गए। आग लगातार आस पास के खेतों में भी फैल गई। इससे अनेक किसानों की लगभग तीन सौ बीघा की नौलाई भी जल कर राख हो गई। बाद में पुलिस और दमकल के प्रयास से आग आगे जाने से रूकी।