
एक शर्त पूरी करे तो हॉकी में फिर ओलम्पिक पदक विजेता बनेगा बन सकता है भारत....कैसे केवल एक शर्त और वह है टशन। खिलाडिय़ों को टशन छोडनी पड़ेगी और फिर पुराने दौर का जुनून पैदा करना होगा। बारां. कुछ नए नियमों ने हॉकी खेल की खूबसूरती को खत्म कर दिया। नियमों में बदलाव करने से पहले अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा व बहस होनी चाहिए। हॉकी में रोमांच को वापस लाने के लिए यह आवश्यक भी है। इसके अलावा निचले स्तर की प्रतिभाओं को आर्थिक संबल भी मिलना चाहिए। यह बात शनिवार को बारां आए ओलम्पियन, मेजर ध्यानचंद के पुत्र व राजस्थान महिला अकादमी के मुख्य प्रशिक्षक अशोक ध्यानचंद ने 'पत्रिकाÓ से चर्चा में कही। उन्होंने कहा कि मुख्य रूप से खिलाड़ी के टर्निंग व ऑफ साइड नियमों में किए गए बदलाव से हॉकी खेल की खूबसूरती खत्म व रोमांच खत्म हो गया है।
Read more :प्रेमी संग कर रही थी ऐसा काम ,पति ने रंगे हाथों पकड़ा तो महिला ने दिखा दिया कारनामा...
दर्शक हॉकी मैदान से दूर होने लगे हैं
यही कारण है कि दर्शक हॉकी मैदान से दूर होने लगे हैं। दर्शकों को खेल मैदान में लाने के लिए इन समेत अन्य नियमों की समीक्षा होनी ही चाहिए। इस अवसर पर जिला ओलम्पिक संघ के सचिव हरिनारायण सिंह भी मौजूद थे। कुछ नए नियमों ने हॉकी खेल की खूबसूरती को खत्म कर दिया। नियमों में बदलाव करने से पहले अन्तरराष्ट्रीय स्तर पर व्यापक चर्चा व बहस होनी चाहिए। हॉकी में रोमांच को वापस लाने के लिए यह आवश्यक भी है।
संबल भी मिलना चाहिए
इसके अलावा निचले स्तर की प्रतिभाओं को आर्थिक संबल भी मिलना चाहिए। दर्शकों को खेल मैदान में लाने के लिए इन समेत अन्य नियमों की समीक्षा होनी ही चाहिए। इस अवसर पर जिला ओलम्पिक संघ के सचिव हरिनारायण सिंह भी मौजूद थे।