बारां

जंगलों में दुर्लभ जड़ी बूटियों की भरमार, जानकारी के अभाव में हो रहीं विलुप्त

बारां जिले के शाहबाद क्षेत्र में जीवनदायिनी जड़ी बूटियोंके की भरमार है। कई असाध्य रोगों की दवाएं क्षेत्र के जंगलों में पाई जाती हैं। ये आयुर्वेदिक दवाइयां बनाने में काफी उपयोगी हैं। लेकिन जानकारी के अभाव में बेशकीमती जड़ी बूटियां विलुप्त होने के कगार पर हैं।
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Updated: 28 Sep 2022, 1:38 PM IST
जंगलों में दुर्लभ जड़ी बूटियों की भरमार, जानकारी के अभाव में हो रहीं विलुप्त
600 तरह की जड़ी बूटियां हैं शाहबाद क्षेत्र के जंगलों में

600 तरह की जड़ी बूटियां हैं जंगलों में
क्षेत्र के जंगलों में कई तरह की जड़ी बूटियां हैं। इनमें से कई ऐसी हैं जो अन्य स्थानों पर नहीं पाई जाती। इनके संरक्षण की जरूरत है। इनमें सेमल, नागबला, वाराही कंद, कुसुम, कुटज, बांझ ककोड़ा, कठबेर, लता, बदर, नोनी द्रोणपुष्पी, शितिवार, माईमौसा हिमालयाना, मार्सडेनिया, टर्मिनलिया टोमेंटोसा, ज्योतिषमति, सालपर्णी, गोजिह्वा, पाषाणभेद, कलिहारी बलाभूमिबला, जीवंती, पुत्रजीवक, बड़ी गुग्गुलु हल्दु, बड़ी कटेरी, एम्पेलोसिसस लाटीफ ोलिया, सिसस रेपण्डा, बालसमीना, कालीजीरी रिक्सिया शामिल हैं।
उम्रदराज सहरिया लोगों को जानकारी
सहरिया समाज के उम्रदराज लोग इनके सेवन से प्रतिकूल मौसम का आसानी से सामना कर लेते हैं। कड़ाके की ठण्ड में कम कपड़ों में गुजारा और तेज गर्मी में सरलता से जीवन यापन कर लेते हैं। इन जड़ी.बूटियों के ज्ञान व प्रचार प्रसार से इस क्षेत्र की दिशा व दशा बदली जा सकती है।

बारां के उपवन संरक्षक दीपक गुप्ता का कहना है कि क्षेत्र के जंगल को कंजर्वेशन क्षेत्र घोषित कर रखा है। यह जंगल विविधता से भरपूर हैं। कई तरह की दुर्लभ वनस्पति जड़ी बूटियां पाई जाती हैं। जानकार बुजुर्गों को साथ लेकर ग्राम पंचायतों के माध्यम से कार्य योजना तैयार की जाएगी।
- हुकम दत्त भार्गव

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