जानती थी इस दुनिया के भेडिये कभी भी एक युवा भिखारिन को नोंच सकते हैं। वह अपनी बेटी के साथ हमेशां साये की तरह सुरक्षा में रहती थी
एक मां कैसे बन गई पगली,फटेहाल घूमती विमंदित महिला को आखिर कैसे मिला अपना घर,जानिए एक बेबस मां की कहानी---
बारां. बेटी किसे प्यारी नहीं होती। उसे भी थी। हमेशां अपने साथ रखती थी। खुद कचरा बीन कर अपना ही नहीं अपनी बेटी का भी जीवन संवार रही थी। ना कभी भीख मांगती थी और ना ही कभी उसने बेटी को भीख मांगना सिखाया था। जानती थी इस दुनिया के भेडिये कभी भी एक युवा भिखारिन को नोंच सकते हैं। वह अपनी बेटी के साथ हमेशां साये की तरह सुरक्षा में रहती थी। लेकिन खुदा को शायद यह मंजूर नहीं था। पता नहीं कहां से एक हैवान आया और उसकी किशोर वय की बेटी को रात में उठा कर ले गया। बेटी क्या गुम हुई उसकी दुनिया भी काली हो गई। एक मां पगली बन गई। कभी अपनी बेटी को याद कर- कर रोने लगी। कभी अपनी किस्मत पर चीखने लगी। कभी लोगों पर चिल्लाने लगी। कभी होशोहवास खो कर लोगों पर पत्थर फेरने लगी। सड़कों पर फटेहाल घूमती,लाचार, परेशान और विमंदित इस महिला के जीवन में कोटा के समाज सेवी मनोज आदिनाथ एक सहारा बन कर आए। और उसे आखिर अपना घर का आश्रय मिल गया। यह विमंदित महिला बारां के महिला थाने के पीछे पुराने सिविल लाइन इलाके में लम्बे समय से एक नाली के पास रह रही थी। विमंदित होने से कई बार महिला राहगीरों पर पत्थर भी फैंकने लगती थी। रविवार को अपना घर संस्था को इसकी सूचना मिली तो वह अपनी एम्बुलेंस लेकर आए और कोटा स्थित अपना घर ले गए। महिला को वहां नहला-धुला कर साफ कपड़े पहनाए गए। उसे भोजन आदि देकर उसका इलाज शुरू किया गया है।
ह्यूमन हेल्प लाइन के मनोज जैन आदिनाथ ने बताया कि राजस्थान पत्रिका के कार्मिकों की मदद से इस महिला की जानकारी मिली थी। जानकारी मिलने के बाद अपना घर के नर्सिंंग कर्मचारी अब्दुल कादिर, व महिला सेवा साथी रूबीना एवं मेघसिंह को एम्बुलेंस लेकर बारां भेजा। यहां महिला नाली के किनारे जमीन पर पड़ी थी। उसे मुश्किल से काबू कर एम्बुलेंस में बैठाया और कोटा स्थित अपना घर में पहुंचाया। सोमवार को महिला का मेडिकल चेकअप करवा कर उसके परिजनों की तलाश की जाएगी। जानकारी के अनुसार महिला के साथ कुछ माह पहले तक एक किशोरी जो उसकी बेटी बताई जाती है दिखाई देती थी। कुछ माह पहले अचानक कोई उसे उठा ले गया। तब से ही महिला का मानसिक संतुलन खराब हो गया ।यह राहगीरों के साथ मारपीट ही नहीं करने लगी अपितु कइयों पर पत्थर भी फेकने लगी थी। अब्दुल कादिर ने बताया कि महिला अभी अपना नाम पता बताने में सक्षम नहीं है। कोटा शिप्ट करने से पहले बारां पुलिस को सूचना देकर महिला को अपना घर लाया गया।