
सरकारी फरमानों का नतीजा कैसा होता है। फरमानों की हकीकत आपको जाननी है तो इस खबर को पढिय़े। सरकार ने दो स्कूलों को एक करने का फरमान तो जारी कर दिया लेकिन असलियत जान ही नहीें पाए। ऐसे में कागजों में तो एक स्कूल चल रहा है लेकिन असल में दो स्थानों पर स्कूल चलाना पड़ रहा है। शिक्षा विभाग की एकीकरण योजना के तहत मर्ज किए गए कुछ स्कूलों की व्यवस्था सुधर तो नहीं, पटरी से जरूर उतर गई। कागजों में तो स्कूल मर्ज होने से एक हो गया, लेकिन वास्तविकता में स्कूल दो भवनों में ही चल रहा है। दो जगह प्रार्थना सभाएं हो रही है तो पोषाहार व्यवस्था भी दो जगह करनी पड़ रही है। इस स्थिति में प्रधानाध्यापिका समेत अन्य स्टाफ को एक भवन से दूसरे भवन के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। शहर के सदर बाजार व सर्राफा बाजार की तंगी गलियों में स्थित पुराना थाना बालिका माध्यमिक विद्यालय के हाल कमोबेश इसी तरह के है। एक भवन सदर बाजार में है तो दूसरा भवन सर्राफा बाजार की गली में है, लेकिन एक एकीकृत भवन में स्कूल का संचालन नहीं किया जा रहा। स्कूल स्टाफ का वार्षिक वेतन बजट करीब दो करोड़ रुपए है।
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कम्प्यूटर खा रहे धूल
पुराना थाना स्कूल भवन में कक्षों की जीर्ण-शीर्ण हालत होने से स्कूल की कम्प्यूटर लैब भी प्लास्टिक में सीलबंद पड़ी है। स्कूल में आईसीटी कम्प्यूटर लैब है तथा करीब दस लाख की लागत के कम्प्यूटर समेत लैब के अन्य उपकरण है। इन उपकरणों को सीलबंद रखने के लिए भी जगह का टोटा होने से एक कक्षा कक्ष में ही रखना पड़ रहा है। उस कक्ष में भी एक साथ दो कक्षाओं को बैठाना पड़ रहा है। मजबूरी यह है कि छात्राएं कम्प्यूटर तो देख सकती है, लेकिन की-बोर्ड व माउस पर हाथ नहीं चला सकती।
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क्लिक योजना ना प्रोजेक्ट उत्कर्ष
छात्राओं के हित में विभागीय निर्देशों के मुताबिक उचित शिक्षण व्यवस्था एवं राज्य सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं के अलावा अलग-अलग भवन होने से प्रार्थना सभा, अनुशासन व्यवस्था, पोषाहार कार्यक्रम, स्मार्ट क्लास, क्लिक योजना, प्रोजेक्ट उत्कर्ष आदि का प्रभावी ढंग से संचालन नहीं हो पा रहा है। वहीं किसी तरह का कार्यक्रम आयोजन करने पर छात्राओं व अभिभावकों के बैठने के लिए भी जगह नहीं है।
&विद्यालय को एक एकीकृत भवन में संचालित करने तथा दो कमरों के निर्माण के स्थान पर पूरा भवन जमींदोज कर नवनिर्माण कराने की जरूरत है। दो अलग-अलग गलियों में विद्यालय होने व कुछ कक्ष क्षतिग्रस्त होने से हादसा होने का अंदेशा रहता है। फिर भी उपलब्ध व्यवस्था के मुताबिक बेहतर करने का प्रयास रहता है।
पिंकी मेहता, प्रधानाध्यापिका, राबामावि बारां
&फिलहाल दो कक्षों के लिए कार्यादेश हुए है। बच्चों की संख्या के मुताबिक भवन के नवनिर्माण के लिए उच्चाधिकारियों को लिखा जाएगा।
प्रहलाद राठौर, अतिरिक्त जिला शिक्षा अधिकारी (मा)