प्रदेश के गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया का गृह नगर होने के बावजूद यहां गोवंश संरक्षण के अभाव में असमय काल का ग्रास बन रहा है। लावारिस गोवंश की कोई सुध नहीं ले रहा। इसके लिए वह कई जिम्मेदार अधिकारियों से गुहार भी लगा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।
बारां. शहर में गोवंश की दुर्दशा का आरोप लगाते हुए बुधवार सुबह एक युवक पुरानी सिविल लाइन्स क्षेत्र स्थित जलदाय विभाग की टंकी (उच्च जलाशय) पर जा चढ़ा। इसकी जानकारी मिलने के बाद पुलिस व नगर परिषद के अधिकारी, कर्मचारी मौके पर पहुंचे। जिन्होंने काफी देर तक समझाइश की। इससे करीब तीन घंटे बाद युवक नीचे उतर आया। यह युवक पूर्व में गोवंश की सुध लेने की मांग को लेकर कई अधिकारियों से मिला था तथा उसने समस्या का समाधान नहीं होने पर कठोर कदम उठाने की धमकी दे चुका था।
सुबह करीब पौने सात बजे शहर की शंकर कॉलोनी निवासी युवक दीपांशु गेरा पेयजल टंकी पर जा चढ़ा। गेरा का आरोप था कि वह लम्बे समय से शहर में गोवंश की दुर्दशा को लेकर खासा आहत है। प्रदेश के गोपालन मंत्री प्रमोद जैन भाया का गृह नगर होने के बावजूद यहां गोवंश संरक्षण के अभाव में असमय काल का ग्रास बन रहा है। लावारिस गोवंश की कोई सुध नहीं ले रहा। इसके लिए वह कई जिम्मेदार अधिकारियों से गुहार भी लगा चुका है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही। इसके चलते उसे जिम्मेदार अधिकारियों का ध्यान आकर्षित करने के लिए मजबूरन यह कदम पड़ा है। पुलिस सूत्रों ने बताया कि इस मामले में युवक के खिलाफ विधि सम्मत कार्रवाई की जाएगी।
सूचना पर पहुंचे अधिकारी
युवक के टंकी पर चढऩे की सूचना के बाद एसडीएम दिव्यांशु शर्मा, पुलिस उपाधीक्षक मनोज गुप्ता, शहर कोतवाली प्रभारी मांगेलाल यादव, तहसीलदार अब्दुल हफीज, नगर परिषद आयुक्त मनोज मीणा समेत जलदाय विभाग के अधिकारी व कर्मचारी सूचना पर कोतवाली थानाधिकारी मांगेलाल यादव व नगर परिषद आयुक्त मनोज मीणा मौके पर पहुंचे तथा समझाइश के प्रयास शुरू किए। इस दौरान बड़ी संख्या में लोग जमा हो गए। प्रशासन ने पुलिस जाप्ते को भी बुलवाकर तैनात किया।
परिषद अधिकारियों को निर्देश
एसडीएम दिव्यांशु शर्मा ने बताया कि नगर परिषद आयुक्त को बुलाकर गौ सेवकों के साथ वार्ता की गई तथा निर्देश दिए की शीघ्र ही सड़कों पर आवारा मवेशियों की समस्या का समाधान किया जाए। गोशाला की व्यवस्था को भी व्यवस्थित किए जाने के निर्देश नगर परिषद आयुक्त को दिए। यह युवक करीब पौने सात बजे टंकी पर चढ़ा था, लेकिन सीढिय़ों के बीच में अवरोध लगाने से ऊपर नहीं जा सका। करीब तीन घंटे बाद वह नीचे उतर आया।
पहले मां-बेटे ने की थी गांधीगिरी
करीब 25 दिन पूर्व 2 अक्टूबर को भी इसी टंकी पैतृक सम्पत्ति के विवाद के चलते मां-बेटे भी इस टंकी पर चढ़ गए थे। इन दोनों का कहना था कि जिन्हें भी खासी मशक्कत के बाद नीचे उतारा गया था। यह पेयजल टंकी शहर के मध्य स्थित होने तथा इसकी सुरक्षा के माकूल प्रबंध नहीं होने से अब तक कई लोग इस पर चढ़कर अपना विरोध जता चुके हैं। इसके बावजूद जलदाय विभाग के अधिकारी माकूल बंदोबस्त नहीं कर रहे।