
दरअसल इस शहर में अंधेरे ने जैसे अपना घर बना लिया है। नेताओं की बात तो दूर अधिकारी किसी की भी नहीं सुनते । जनता है कि रोष प्रदर्शन कर अपने घर बैठ जाती है। लगता है अधिकारियों ने इस अंधेरे के बहाने सरकार की ही बत्ती गुल करने की ठान ली है। हम बात कर रहे हैं बारां शहर की बारां. शहर में मौसम बदलने के साथ हुई बारिश ने विद्युत वितरण निगम की व्यवस्थाओं की पोल खोलकर रख दी। बारिश के साथ ही एक दो नहीं शहर में स्थित चारों विद्युत ग्रिड स्टेशन (जीएसएस) जवाब दे गए। कुछ ही मिनटों में चारों जीएसएस फाल्ट आने से ठप हो गए तो पूरे शहर में अंधेरा छा गया। चारमूर्ति चौराहा के समीप स्थित 33 केवी जीएसएस का जम्पर जल गया तो करीब एक घंटे के दौरान उसे दुरुस्त कर दिया था, लेकिन वह वापस बैठ गया। उसके बाद बाबजी नगर जीएसएस की खराब दूर हुई, लेकिन नियाना जीएसएस के हीकड़ फीडर व हॉस्पिटल जीएसएस का फाल्ट ढूंढऩे में काफी देर लग गई। फिर भी करीब पौने आठ से रात साढ़े दस बजे तक पूरे शहर में विद्युत व्यवधान बना रहा। हॉस्पिटल जीएसएस से जुड़े क्षेत्र में तो करीब साढ़े चार घंटे बाद रात साढ़े 12 बजे आपूर्ति शुरू हुई। इस दौरान बारिश के चलते कर्मचारियों को काम करने में दिक्कत आई तो लोगों को खासी परेशानी का सामना करना पड़ा।
ऐसे ढ़ूंढ़ते रहे फाल्ट
हॉस्पिटल जीएसएस का फाल्ट तलाशने में बारिश के दौरान भी अभियंता व कर्मचारियों के पसीने छूट गए। जीएसएस को चैक करने के बाद टीम ने कोटा रोड स्थित 132 केवी जीएसएस से लाइन को चैक करना शुरू किया, लेकिन काफी देर बाद भी नहीं मिला तो एक-एक टावर के समीप कर्मचारी खड़े किए गए। कुछ खराबी कोटा रोड से मेलखेड़ी रोड पर मिली। इस दौरान बार-बार आपूर्ति बंद चालू करनी पड़ी। इसके बाद एक-एक कर चैक करते हुए कॉलेज रोड पहुंचे तो यहां चिकित्सालय के पीछे से जीएसएस पर आ रही लाइन के एक खम्भे पर पिन इंसूलेटर पंचर मिला।
दिक्कत हुई थी
बिजली गिरने व बारिश के कारण फाल्ट आने से दिक्कत हुई थी। फिर भी एक साथ अलग-अलग टीम लगाकर हॉस्पीटल जीएसएस को छोड़ शेष तीनों जीएसएस से जल्दी आपूर्ति शुरू कर दी गई थी। रुक-रुक कर बारिश चालू रहने से भी बार-बार काम बंद करना पड़ा।
जीएस बैरवा, अधीक्षण अभियंता, जविविनि