618 रहे अनुपस्थित, 11089 ने दी परीक्षा, जिले में 47 केन्द्रों पर दोपहर से शाम तक हुई परीक्षा
बारां. सेवापूर्व शिक्षक प्रशिक्षण पाठ्यक्रम प्रारम्भिक शिक्षा डिप्लोमा (प्री-डीएलएड) सोमवार को जिले के 47 केन्द्रों पर हुई। परीक्षा को लेकर अभ्यर्थियों में खासी ललक रही। दूर-दराज क्षेत्र के अलावा आस-पास के जिलों के अभ्यर्थी भी परीक्षा देने पहुंचे। परीक्षा में जिले के परीक्षा केन्द्रों पर 94.72 फीसदी अभ्यर्थी शामिल हुए ओर निर्धारित समय से पहले ही परीक्षा केन्द्रों पर लम्बी कतारें लगी रही। इसी से शिक्षक बनने की ललक और सरकारी नौकरी के प्रति उत्साह का अंदाजा लगाया जा सकता है। नोडल अधिकारी सीडीईओ रामदेवली मीणा व सहायक निदेशक रामपाल मीणा ने बताया कि परीक्षा के सफल संचालन को लेकर नियुक्त किए गए प्राधिकृत अधिकारी (एओ) परीक्षा केन्द्रों का निरीक्षण करते रहे। एओ ने परीक्षा से पूर्व सहायक सामग्री वितरण करने और परीक्षा समाप्ति पर सामग्री एकत्र कर उसे संग्रहण केन्द्र पर जमा कराया।
लगी रही लाइनें
परीक्षा के दौरान नकल व किसी तरह की अवांछित गतिविधियों पर नियंत्रण को लेकर विशेष एहतियात बरती गई। अभ्यर्थियों को सीधे परीक्षा कक्षों में प्रवेश नहीं देकर उन्हें केन्द्र के बाहर ही कुछ देर रोका गया। अभ्यर्थी कतारबद्ध होकर खड़े रहे। तय समय पर एक-एक को सावधानीपूर्वक जांच करने के बाद प्रवेश दिया गया। इससे परीक्षा केन्द्रों के बाहर महिला-पुरूष अभ्यर्थियों की लाइनें लगी रही। यहां कन्या महाविद्यालय परिसर में अभ्यर्थियों ने लम्बी लाइन में रहकर बारी का इंतजार किया। अभ्यर्थियों को प्रवेश-पत्र आईडी के अलावा अन्य किसी सामग्री के साथ प्रवेश नहीं दिया गया।
& यों तो पेपर ठीक ही रहा है। कुछ प्रश्नों को हल करने में समय लगा, कुछ सरल होने से फटाफट हो गए। तैयारी करने वालों के लिए तो खास कठिन नहीं था।
सुरेश मीणा, रांवा, छीपाबड़ौद
& गणित व हिन्दी के सवाल ठीक, अंग्रेजी के हार्ड थे। कोङ्क्षचग वालों के लिए अच्छा रहा। संस्कृत के प्रश्रों ने उलझाया। दिक्कत नहीं हुई। बढिय़ा पेपर था।
दीपक गुर्जर, तिसाया
&जीके और हिन्दी के प्रश्न सरल रहे। अंग्रेजी के प्रश्नों ने जरूर उलझाया। फिर भी पेपर अच्छा रहा। अच्छे अंक मिलने की उम्मीद है। कन्हैयालाल गुर्जर, मुण्डकी, छीपाबड़ौद & पेपर पहले वाले से इस बार का अच्छा था। केवल रीजङ्क्षनग में थोड़ा सा समय खराब हो गया। वैसे हिन्दी और व्याकरण के प्रश्न सरल थे, इतने अधिक कठिन नहीं थे।
वर्षा मीणा, राजपुरा