-सडक़ और सिंचाई तंत्र के नवनिर्माण, मरम्मत कराने पर आपत्तियां -करोड़ों के कार्य हो रहे प्रभावित, लोगों को करना पड़ रहा लंबा इंतजार बारां. जंगलों के संरक्षण की जिम्मेदारी और विकास की जरूरतों के बीच फंसा बारां जिला दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर वन क्षेत्र बचाने की बाध्यता है तो दूसरी ओर इन्हीं […]
-सडक़ और सिंचाई तंत्र के नवनिर्माण, मरम्मत कराने पर आपत्तियां
-करोड़ों के कार्य हो रहे प्रभावित, लोगों को करना पड़ रहा लंबा इंतजार
बारां. जंगलों के संरक्षण की जिम्मेदारी और विकास की जरूरतों के बीच फंसा बारां जिला दोहरी मार झेल रहा है। एक ओर वन क्षेत्र बचाने की बाध्यता है तो दूसरी ओर इन्हीं वन भूमियों के कारण सडक़, सिंचाई, जलापूर्ति और अन्य बुनियादी विकास कार्य सालों से अटके पड़े हैं। नतीजा यह कि न तो विकास कार्य समय पर पूरे हो पा रहे हैं और न ही ग्रामीणों की समस्याओं का समाधान हो रहा है। जिले में कई ऐसे प्रस्तावित विकास कार्य हैं, जो वन विभाग की भूमि में आने के कारण प्रारंभिक स्तर पर ही अटक गए। कहीं सडक़ निर्माण को लेकर अनुमति नहीं मिल पा रही, तो कहीं सिंचाई तंत्र और जल संरचनाओं के विस्तार पर आपत्तियां लग रही हैं। अकेले बारां जिले में ही करोड़ों रुपए की योजनाएं इन प्रक्रियाओं के चलते प्रभावित हो रही हैं।
बनेगी कैनाल
जिले की करीब 37 करोड़ की प्रमुख सिंचाई परियोजना अहमदी लघु सिंचाई परियोजना का बांध बनने के बाद अहमदी से अहमदा, बजरंगगढ़, कुंडी व ख्यावदा तक की 3 किमी कैनाल का कार्य वन भूमि होने से अटका हुआ था। जबकि जल संसाधन विभाग की ओर से 2023 में इसके बदले छीपाबड़ौद क्षेत्र में जमीन भी आवंटित कर दी गई थी ओर एक करोड़ 5 लाख की राशि भी जमा कर दी थी। अगस्त 2025 में करीब 2.6 करोड़ की लागत से इस कैनाल निर्माण के कार्यादेश जारी किए गए थे। काफी प्रयासों के बाद 9 जनवरी को इसकी वर्किंग परमिशन मिली है। अब काम शुरू होगा। इस परियोजना से करीब 726 हेक्टेयर जमीन सिंचित होगी।
ग्रामीण क्षेत्रों में सडक़ निर्माण भी अटका
सबसे गंभीर स्थिति ग्रामीण क्षेत्रों में सडक़ों की है। सार्वजनिक निर्माण विभाग के 41 सडक़ निर्माण कार्यों में से 38 के निर्माण में वन विभाग का रोड़ा है। इनमें केन्द्र सरकार की पीएम जनमन योजना के तहत स्वीकृत सडक़े भी है। प्रस्तावित मार्ग वन भूमि से होकर गुजरते हैं। स्वीकृति की लंबी प्रक्रिया और आपत्तियों के चलते काम शुरू नहीं हो पा रहा। इससे ग्रामीणों को आवागमन, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच में परेशानी उठानी पड़ रही है।
विरोध नहीं, संतुलन जरूरी
प्रभावित क्षेत्र के लोगों का कहना है कि वे जंगल संरक्षण के विरोध में नहीं हैं, लेकिन विकास और पर्यावरण के बीच संतुलन जरूरी है। समयबद्ध निर्णय और वैकल्पिक समाधान नहीं मिलने से आमजन को कीमत चुकानी पड़ रही है। विकास कार्यों के प्रभावित होने से रोजगार, खेती और दैनिक जीवन सभी पर असर पड़ रहा है। इस तरह बारां जिले में वन संरक्षण और विकास के बीच संतुलन साधना जलसंसाधन और सार्वजनिक निर्माण विभाग के लिए बड़ी चुनौती बना हुआ है। यदि जल्द ठोस नीति और व्यावहारिक समाधान नहीं निकाले गए, तो आने वाले वर्षों में भी जिले का विकास इसी तरह धीमी गति से होगा।
प्रस्तावित, अटके सडक़ कार्य अमलसरा-कैथोड़ी मोहम्मदपुरा, रामगढ़ माताजी-पखराना, गंजन-सुवांस, शाहाबाद-राजपुर, भंवरगढ़-नाहरगढ़ चौड़ीकरण, बिची-रामपुर उपरेटी, कस्बाथाना-बमनगवां, गोरधनपुरा-घाटा, मामली लक्ष्मीपुरा-पटपड़ी, जलवाड़ा -किशनपुरा, रामगढ़ कालापट्टा से करवर लक्ष्मीपुरा, खंडेला-हलवानी, भंवरगढ़-रणवासी, गोरधनपुरा-कालामाटी, चौराखड़ी-महेशपुर वाया नयागांव, परनिया-छतरगंज, केदारकुई-मुहाल, कॉलोनी-आमखोह वाया बैंत, एनएच से सहरिया बाआवि किशनगंज, डिकवानी-गदर इसाटोरी, बिची रामपुर उपरेटी से बलारपुर सहरिया बस्ती, एनएच से बिरमानी, कस्बाथाना बमनवां-छैला, गरडा गोपालपुरा-डांडी बटका, गरडा जैसवा से सेलापानी, कोटरा-कुंडा तक पुल, चौड़ीकरण, खांडा सहरोल-गेसुवां, गरडा गोपालपुरा-राजाखेड़ा,बहराई-अमरोरा धुवां, बिछी-मोहनपुर, एप्रोच बहराई, छबड़ा में डाडा-कंचनपुरा, बावड़ीखेड़ा अप्रोच, चैनपुरिया-सूरजपुरमाळ, करणी-रामनगर, कोटड़ी-डाबरी, सीजन्या अप्रोच, पाली-नवाबपुरा, हिंगलोट-मदनाखेड़ी, कोटा-धरनावदा, पतरी-बटगांव रोड के कार्य अटके हुए है।
-वन विभाग की क्लेयरेंस नहीं मिलने से सडक़ विकास के काफी कार्य नहीं हो रहे है। 38 सडक़ों के कार्य प्रभावित हो रहे है। इनमें से 7 सडक़ तो डी सेशन के लिए भेजी गई है। पीएम जनमन की हाल ही में स्वीकृत 12 में से 8 में वन जमीन आ रही है। 2 सडक़ों की वर्किंग परमिशन मिली है। इसके टैंडर लगा दिए गए है।
-एचसी मीणा, एसई, पीडब्ल्यूडी
-अहमदी परियोजना की 3 किमी कैनाल निर्माण का कार्य वन विभाग की आपत्ती के चलते नहीं हो रहा है। इससे ग्रामीण किसानों को लाभ नहीं मिल रहा है। अब किसी तरह वर्किंग परमिशन मिली है। जल्द काम शुरू होगा।
-जितेन्द्र शेखर, एसई, जल संसाधन विभाग