नगर परिषद बारां : राजनीतिक चौसर का कोई घोड़ा छूट ना भागे सो दोनों ही पार्टियों ने पार्षदों को बाड़ेबंदी में ले लिया है।
बारां. नगर परिषद बारां के पार्षदों की पौ बारह पच्चीस होने की संभावना बलवती हो रही है। दो वार्ड चुनाव के बाद होने वाले सभापति चुनाव के लिए दोनों ही पार्टियों का राजनीतिक ऊंट रूपयों की थैली पेट में बांधे घूम रहा है। राजनीतिक चौसर का कोई घोड़ा छूट ना भागे सो दोनों ही पार्टियों ने पार्षदों को बाड़ेबंदी में ले लिया है।बारां. नगरपरिषद बारां के दो वार्डों के उपचुनाव 17 दिसम्बर को होंगे। वैसे तो सीधे तौर इन दोनों ही वार्डों के नतीजे अगले सभापति के भाग्य का फैसला करेंगे, लेकिन राजनीति में सीधा कुछ भी नहीं होता। राजनीति का ऊंट कब किस करवट बैठता है, बताना मुश्किल हो जाता है। कांग्रेस जहां बारां नगर परिषद पर कब्जा बरकरार रखने के लिए ऐड़ी-चोटी का जोर लगा रही है तो भाजपा आम चुनाव में एक मत से मिली हार का बदला भांजने का मौका भुनाने के भरसक प्रयास कर रही है। दोनों ही दलों के लिए उप चुनाव में जीत जितनी जरूरी है, उससे ज्यादा चुनौती करीब सवा दो साल पहले निर्वाचित पार्षदों की दलीय निष्ठा को बनाए रखना भी है। इसके चलते कांग्रेस व भाजपा ने अपने अधिकांश पार्षदों को अज्ञातवास पर भेज दिया है।
अब पार्षदों से सहज नहीं संवाद
भाजपा व कांग्रेस के पार्षद अपना अज्ञातवास कहां काट रहे हैं, यह इन दलों के अधिकांश नेताओं व पार्टी पदाधिकारियों को पता नहीं है। पार्षदों के मोबाइल फोन भी लेकर उनके परिजनों को दे दिए गए हैं। अब पार्षद अज्ञातवास से किसी दूसरे नम्बरों से ही परिजनों से बात कर रहे हैं। ऐसे में इन पार्षदों से बातचीत करना सहज नहीं रहा।
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हो गया जुगाड़
दोनों ही दलों के वरिष्ठ नेता विपक्षी खेमे में सेंधमारी के प्रयास सफल होने का दावा करने में नहीं हिचक रहे। पार्टीजनों से आपसी चर्चा में यह कहते हैं कि चिन्ता की कोई बात नहीं। सभापति पद के चुनाव में जीत के लिए पर्याप्त पार्षदों का जुगाड़ हो गया है।
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पदाधिकारी वार्डों में भी लगा रहे जोर
कांग्रेस व भाजपा के नेता वार्ड 11 व 38 में हो रहे उप चुनाव में अपने उम्मीदवारों की जीत के लिए भी पूरा जोर लगा रहे हैं। अब डोर-टू-डोर पहुंच मतदाताओं की मनुहार की जा रही। जीत के लिए जातिगत समीकरण भी साधे जा रहे हैं। अब किस दल में कितनी ताकत है, इसका पता 19 को मतगणना से पता चलेगा।वर्तमान में नगर परिषद के43 वार्डों में कांग्रेस के 22 व भाजपा के21 पार्षद हैं। ऐसे में २ वार्डों में होने वाला उप चुनाव काफी अहम है। कांग्रेस एक वार्ड में जीत के साथ अपनी बढ़त बरकरार रख सकती है तो भाजपा दोनों वार्डों में जीत कर कांग्रेस को शहर की सरकार से बेदखल कर सकती है। यह सीधा गणित है, लेकिन आम चुनाव के दौरान हुई क्रॉस वोटिंग की संभावना से इस बार भी इनकार नहीं किया जा सकता।