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Farming Tips: कम लागत-ज्यादा मुनाफा, राजस्थान के युवा किसान ने अपनाई खेती की आधुनिक तकनीक

Rajasthan News: देवरी क्षेत्र के बीलखेड़ा माल के युवा किसान विष्णु राठौर ने अश्वगंधा की खेती शुरू की है और रबी सीजन में उन्होंने करीब एक बीघा जमीन में इसकी बुवाई की थी, जिसमें करीब ढाई क्विंटल उत्पादन हुआ है।

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File Photo: Patrika

Ashwagandha Farming Profit: परंपरागत खेती में आय कम होने से अब युवा किसान उन्नत खेती अपना रहे हैं, जिसमें औषधीय, मसाला फसलें भी शामिल हैं। इन फसलों में कम लागत में बेहतर आय हो रही है। नई सोच और आधुनिक तकनीकों के उपयोग से ये किसान न सिर्फ अपनी आमदनी बढ़ा रहे हैं, बल्कि अन्य किसानों के लिए भी प्रेरणा बन रहे हैं। खेती में ड्रिप सिंचाई, जैविक खाद और आधुनिक बीजों के उपयोग से उत्पादन बढ़ रहा है और किसानों का खर्च भी कम हो रहा है। इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर भी बन रहे हैं।

देवरी क्षेत्र के बीलखेड़ा माल के युवा किसान विष्णु राठौर ने अश्वगंधा की खेती शुरू की है और रबी सीजन में उन्होंने करीब एक बीघा जमीन में इसकी बुवाई की थी, जिसमें करीब ढाई क्विंटल उत्पादन हुआ है। उन्होंने बताया कि पारंपरिक फसलों की तुलना में अश्वगंधा की खेती में लागत कम आती है और बाजार में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है। आधुनिक तकनीक और सही देखरेख के कारण फसल की गुणवत्ता भी बेहतर हुई है, जिससे उन्हें अच्छे दाम मिलने की उम्मीद है।

नीमच मंडी में अश्वगंधा लगभग 22 हजार रुपए प्रति क्विंटल तक खरीद रहे हैं, जिससे उन्हें बेहतर मुनाफे की उम्मीद है। अश्वगंधा एक औषधीय फसल है जिसकी मांग आयुर्वेदिक दवाओं में लगातार बढ़ रही है, इसलिए इसकी खेती किसानों के लिए लाभकारी साबित हो रही है।

दूसरे किसान हो रहे प्रेरित

उन्नत खेती में हो रही लाभ को देखते हुए अन्य किसान भी इसके लिए प्रेरित हो रहे हैं। बीलखेड़ामाल गांव का किसान प्रकाश मेहता दो-तीन सालों से एक दो बीघा में कलौंजी की खेती कर अच्छा मुनाफा कमा रहा है।

उपज बेचने जाना पड़ता है नीमच मंडी

औषधीय और मसाला फसलों की बुवाई करने वाले किसानों को उपज बेचने के लिए नीमच जाना पड़ता है। यदि स्थानीय स्तर पर खरीदी शुरू की जाए, तो इन फसलों की खेती करने वाले किसानों की संख्या बढ़ेगी। किसान इसकी मांग भी कर रहे हैं, लेकिन अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है।