
बारां जिले के आदिवासी सहरिया परिवारों के जीवन पर संकट आ मंडराया है। रोटी कपड़ा और मकान जैसी मूलभूत सुविधाएं तो दूर इन्हें दो जून की रोटी तक नसीब नहीं हो रही है। रोटी के लिए इन्हें महंगा राशन खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। रोटी कपड़ा और मकान देना सरकार का दायित्व है लेकिन इस मामले में राज्य सरकार फेल हो रही है। आदिवासियों के लिए लाई गई मुफ्त राशन योजना यहां दम तोड़ रही है। इसका कारण केवल सरकारी उदासीनता है। दरअसल परिवारों मेें वृद्धि होने पर जब नये राशन कार्ड बनाए गए तो प्रशासन ने इन्हें एपीएल और बीपीएल को दिए जाने वाले राशन कार्ड वितरित कर दिए। ऐसी स्थिति में जंगल जमीन के आसरे रहने वाली यह समाज रोटी के लिए तरस गई है । हालांकि अब सरकार ने फिर से सर्वें करवाने को कहा है।
सहरिया अंत्योदय कार्ड
हाल ही किए सर्वे में नव सृजित परिवारों को सहरिया अंत्योदय कार्ड
जारी किए जाएंगे। सर्वे के अभाव में इन लोगों को एपीएल व बीपीएल की
श्रेणी में ले लिया गया था। नये कार्ड जारी होने के बाद इन्हें सहरिया
अंत्योदय कार्ड धारियों को मिलने वाली सुविधाएं मिल सकेंगी। इन परिवारों
की सर्वे रिपोर्ट रसद विभाग ने खाद्य विभाग जयपुर व जनजातीय विभाग उदयपुर भेज दी है।
आबादी 30 हजार
जिले भर में सहरिया परिवारों की आबादी 30 हजार 775 है। इनमें से 8
हजार 608 परिवार नए हैं। सर्वे के अभाव में इन नये परिवारों के सहरिया
अंत्योदय कार्ड के स्थान पर बीपीएल व एपीएल कार्ड बना दिए गए थे। इससे इन्हें मुफ्त राशन किट नहीं मिल पा रहा था। दूसरी तरफ बीपीएल व एपीएल वाले परिवारों को 5 किलो प्रति यूनिट के हिसाब से गेहूं दिया जाता है। अधिकारियों का कहना है कि कुछ समय पहले राज्य सरकार को सभी सहरिया परिवारों को योजना का लाभ नहीं मिलने की शिकायत मिली थी, इसे गंभीरता से लिया गया। इसके बाद रसद विभाग की ओर से जिले के सभी सहरिया परिवारों का सर्वे किया गया ।
विभाग ने मांगी थी रिपोर्ट
हाल ही में खाद्य विभाग जयपुर व जनजातीय विभाग ने सहरिया परिवारों की रिपोर्ट मांगी थी। रसद विभाग ने सर्वे कर रिपोर्ट भेज दी है। अधिकारियों
का कहना है कि उक्त बीपीएल व एपीएल कार्ड बनवाने वाले परिवारों के भी नए सहरिया अंत्योदय कार्ड जारी किए जाएंगे। इसकी तैयारी पूरी कर ली है।