बारां

तालाब के बीच मंदिर में पांच दिन तक फंसे रहे संत, भूखे रहे

पिछले दिनों हुई भारी बारिश के चलते शहर में पानी से लबालब हो गए डोलमेला तालाब के बीच बने बगरुधाम महादेव मंदिर में एक संत पांच दिन तक फंसे रहे। पानी में भीगने से व मोबाइल का बैलेन्स खत्म हो जाने से वे किसी से सम्पर्क नहीं कर पाए।

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Aug 28, 2025
source patrika photo

एसडीआरएफ की टीम ने किया रेस्क्यू

बारां. पिछले दिनों हुई भारी बारिश के चलते शहर में पानी से लबालब हो गए डोलमेला तालाब के बीच बने बगरुधाम महादेव मंदिर में एक संत पांच दिन तक फंसे रहे। पानी में भीगने से व मोबाइल का बैलेन्स खत्म हो जाने से वे किसी से सम्पर्क नहीं कर पाए। पास रखी राशन सामग्री खत्म होने से वे दो दिन भूखे रहे। लापता होने की सूचना पर एसडीआरएफ की टीम ने बुधवार को उन्हें बगरुधाम से रेस्क्यू किया। शहर में मांगरोल रोड पर डोलमेला तालाब के मध्य बगरुधाम महादेव का मंदिर स्थित है। यहां पर कई वर्षो से संत रामचन्द्र दास सेवा पूजा करते है। यूं तो तालाब में अधिकांश समय नाम मात्र का पानी रहता है। वही कई बार यह सूख भी जाता है। ऐसे में संत मंदिर से पैदल ही शहर में आते-जाते है। तालाब में कम पानी होने पर वे पीपे से बनाए हुए जुगाड़ से किनारे आ जाते है। पिछले दिनों लगातार बारिश होने से इस बार डोल मेला तालाब लबालब भर गया। पानी अधिक होने से इस बार उनका जुगाड़ काम नहीं आया और मंदिर में ही पिछले पांच दिन से फंसे रहे। इस दौरान उनके पास रखी राशन सामग्री भी खत्म हो गई। ऐसे में उन्हें तीन दिन निराहार ही रहना पड़ा।

थी अनहोनी की आशंका

संत रामचन्द्र दास के करीबी कालूलाल सुमन ने बताया कि संत के पास मोबाइल फोन है। लेकिन बेलेन्स खत्म हो जाने के कारण वह बंद हो गया। उनका किसी से सम्पर्क नही हो पाया। कई दिनों से जब वे तालाब के किनारे नजर नहीं आए तो उनके परिचितों ने किसी अनहोनी की आशंका को देखते हुए बाढ़ नियन्त्रण कक्ष को सूचना दी। इसके बाद एसडीआरएफ की टीम बुधवार सुबह बोट लेकर बगरूधाम मंदिर पहुंची।

छोटी नाव का करेंगे इंतजाम

संत के करीबी कालूलाल सुमन ने बताया कि संत रामचंद्र दास को पर्याप्त राशन सामग्री के साथ वापस मंदिर पर भिजवा दिया गया। अब कोटा से एक छोटी नाव मंगवाई गई है। जो एक-दो दिन में आ जाएगी। यह नाव आने के बाद उन्हें आने जाने में परेशानी नही होगी।

साधना करते मिले

एसडीआरएफ की टीम जब बगरुधाम पर पहुंची तो संत रामचन्द्र दास साधना करते मिले। उन्हें बोट से रेस्क्यू कर किनारे लाया गया। बाद में वे बड़ी मात्रा में राशन सामग्री लेकर वापस मंदिर पर चले गए। उन्होंने बताया कि जुगाड़ की नाव चलाने के लिए लकड़ी छोटी पडऩेे के कारण नाव भी नहीं चला पाए। इसके चलते उन्हें वहीं रहना पड़ा।

Updated on:
28 Aug 2025 05:08 pm
Published on:
28 Aug 2025 05:07 pm
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