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Kuno Cheetah In Baran: बारां के जंगल में पहुंचे कूनो के दो नामीबियाई चीते, KP-2 के पीछे-पीछे पहुंचा छोटा भाई KP-3

कूनो नेशनल पार्क से निकले दो नामीबियाई चीते इन दिनों बारां के जंगलों में सक्रिय हैं। पहले पहुंचे KP-2 के बाद अब उसका छोटा भाई KP-3 भी उसी क्षेत्र में आ गया है।

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Cheetah In Baran

केपी-3 ने डाला डेरा (फोटो: पत्रिका)

Namibian Cheetahs Roaming In Baran Forest: कूनो नेशनल पार्क के चीता केपी-2 के जिले के जंगल में पुन: आने के करीब 16 दिन बाद उसका छोटा भाई केपी-3 भी उसी के पद चिन्हों पर चलते हुए इसी क्षेत्र में पहुंच गया। हालांकि अभी दोनों भाइयों का आपसी मेल नहीं हो पाया है।

दोनों जिले के रामगढ़ क्षेत्र के जंगल में करीब 5 से 6 किमी की दूर पर है। इनके जल्द मिलने की संभावना जताई जा रही है। 14 फरवरी को केपी-2 करीब 78 दिनों के बाद वापस इसी क्षेत्र में लौट आया था। उस दौरान उसे प्रथम बांझआमली में देखा गया था। हालांकि उसने इससे पूर्व भी इसी रेंज में करीब 15 दिन बिताए थे। उसके बाद कूनो की टीम उसे ट्रेंक्यूलाइज करके 12 दिसंबर 2025 को वापस कूनो ले गई थी।

अपने भाई की गंध व पदचिन्हों के सहारे केपी-3 भी 2 मार्च को रामगढ़ रेंज में पहुंच गया था। जहां पर उसने आते ही एक गोवंश का शिकार किया। केपी-2 का क्षेत्र में करीब मूवमेंट बने करीब 19 दिन हो चुके हैं। इस दौरान उसने एक नील गाय का शिकार भी किया। नदी पार कर मांगरोल क्षेत्र में पहुंचा। इसके बाद कूनो की टीम व वन विभाग उसके भोजन का प्रबंध करता आ रहा है।

गुरुवार शाम तक केपी-2 का मूवमेंट रिंझिया गांव क्षेत्र के जंगल में तो केपी-3 का मूवमेन्ट रामगढ़ के असनावर क्षेत्र में बना हुआ है। दोनो की निगरानी जहां कूनो की टीमें के तीन-तीन सदस्य अलग-अलग कर रही है। वहीं साथ में सहयोग देने के लिए किशनगंज व अन्ता रेंज के वन विभाग की दो-दो- कर्मचारियों की टीमें 24 घंटे तैनात है।

परिवार के सदस्यों से ऐसे करता है संपर्क

वन्यजीव एक्सपर्ट के अनुसार नामीबियाई चीता अपने परिवार के सदस्यों से दूर तक संवाद करने के लिए कई तरीकों का उपयोग करता है। चीता अपनी आवाज का उपयोग करके एक दूसरे से संवाद करते हैं। वे विभिन्न प्रकार की ध्वनियां निकालते हैं, गुर्राना, चीखना, और पुकारना। वहीं वे अपनी गंध का उपयोग करके अपने क्षेत्र को चिह्नित करते हैं और एक दूसरे को पहचानते हैं।

ये अपने शरीर की भाषा का उपयोग करके एक दूसरे से संवाद करते हैं, जैसे कि पूंछ की गति, कान की स्थिति और मुख के भाव। वहीं चीते अपनी तेज दृष्टि का भी उपयोग करते है। ऐसे तरीकों से चीता अपने परिवार के सदस्यों से दूर तक संवाद कर सकता है।

पसंद आते हैं खुले घास के मैदान

नामीबियाई चीतों को खुले और घास के मैदान पसंद होते हैं, जहां वे आसानी से शिकार करने के साथ ही अपनी गति का उपयोग कर सकते हैं। ये अपने भोजन में छोटे और मध्यम आकार के जानवरों को शिकार बनाते है। वयस्क चीता एक दिन में लगभगर 3.5 किलोग्राम मांस खा जाता है।

कूनो नेशनल पार्क के दो चीते केपी-2 एवं केपी-3 को जिले के जंगल में मूवमेंट बना हुआ है। जिन पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है। कूनो की टीमो के साथ ही स्थानीय विभाग की टीमे भी तैनात की हुई है। चीतों को यह क्षेत्र भाने से यहां भी इनके प्रवास की उम्मीद बन गई है।
बड़े विवेकानन्द माणिकराव, उप वन संरक्षक, बारां

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