बारां

वन विनाश रोकने के लिए बढऩे लगी सक्रियता, बारां सहित कई जिलों में विरोध शुरू

शाहाबाद के सघन वनक्षेत्र को बचाने के लिए बारां जिले के अलावा कोटा और बूंदी जिले के प्रर्यावरण प्रेमी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं की ओर से भी जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है।

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Oct 05, 2024
शाहाबाद के सघन वनक्षेत्र को बचाने के लिए बारां जिले के अलावा कोटा और बूंदी जिले के प्रर्यावरण प्रेमी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं की ओर से भी जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है।

शाहाबाद में एक लाख पेड़ कटने का मुद्दा पत्रिका ने प्रदेश स्तर तक उठाया

save tree, save forest : बारां. जिले में बिजली प्लांट के लिए पेड़ों पर कुल्हाड़ी चलाने की सैद्धातिक स्वीकृति (प्रथम चरण) लोगों को रास नहीं आ रही है। इस मुद्दे पर जागरूकता को लेकर राजस्थान पत्रिका की ओर से मुहिम शुरू की हुई है। इससे लोगों में जागरूकता बढ़ रही है। पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रहे कई संगठन सक्रिय हो गए है। धीरे-धीरे ओर संगठन और पर्यावरण प्रेमी भी सक्रिय होंगे। शाहाबाद के सघन वनक्षेत्र को बचाने के लिए बारां जिले के अलावा कोटा और बूंदी जिले के प्रर्यावरण प्रेमी और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में कार्य कर रही संस्थाओं की ओर से भी जागरूकता लाने का प्रयास किया जा रहा है। पर्यावरण प्रमियों का कहना है कि प्राकृतिक वनक्षेत्र से इतनी बड़ी संख्या में पेड़ों का विनाश करने के बाद मिलने वाला विकास असहनीय है। जंगलों को बचाने के लिए जिले में प्रकृति कल्याण रामगढ़ दरबार ग्रुप, गायत्री परिवार दीया, वृक्ष मित्र संस्थान, भारतीय संस्कृतिक निधि (इंटेक बारां चैप्टर), नाहरगढ़ ग्रीन एवं विकास संस्थान, राजस्थान कर्मचारी महासंघ लोगों को जागरूक करने में जुटी हुई है। इसके अलावा चंबल संसद कोटा, बूंदी और भीलवाड़ा से पीपुल्स फॉर एनिमल्स के पदाधिकारी भी जुटे हुए है।

पेड़ों को काटने से भविष्य में शाहाबाद क्षेत्र का तापमान करीब 3 डिग्री तक बढ़ जाएगा। तापमान बढऩे से लोगों का स्वास्थ्य प्रभावित होगा। बारिश कम होगी। इससे फसल उत्पादन भी प्रभावित हो सकता है।
बृजेश विजयवर्गीय, संयोजक चंबल संसद, कोटा

सोलर या अन्य तरीके से सस्ती बिजली बनाई जा सकती है। अन्यथा ऐसे क्षेत्र का चयन किया जाए, जहां पेड़ों की संख्या कम हो। शुद्ध वायु युक्त पर्यावरण की कीमत सभी जरूरतों से ऊपर है।
डॉ. इन्द्रनारायण गुप्ता, सेवानिवृत्त निदेशक, प्रसार शिक्षा निदेशालय, कृषि विवि कोटा

पेड़ों को काटा जाना जैव विविधता, पर्यावरण, वन्य जीवों के रहवास को प्रभावित करेगा। इससे शाहाबाद घाटी अपना वैभव खो देगी। विनाश की शर्त पर ऐसा विकास किसी भी हालत में नहीं होने देंगे।
जितेन्द्र कुमार शर्मा, कन्वीनर, इंटेक बारां चैप्टर

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