बारां

राजस्थान के शाहबाद जंगल पर मंडराया संकट: 1.19 लाख पेड़ कटने की खबर से भड़के आदिवासी, CM आवास घेरने का एलान

राजस्थान के बारां जिले में शाहबाद जंगल में 1800 मेगावाट PSP प्रोजेक्ट के विरोध में पर्यावरण संगठनों ने मोर्चा खोल दिया है। संगठनों का दावा है कि 1.19 लाख से ज्यादा पेड़ काटे जाएंगे। विरोध में 20 नवंबर को किसान, आदिवासी और युवा जयपुर में CM आवास पहुंचेंगे।
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Sep 30, 2026
shahbad forest
प्रेस वार्ता करते हुए पार्टी के पदाधिकारी (फोटो: Peoples green Party)

Shahabad Forest News: जयपुर/बारां: बारां जिले के शाहबाद कंजर्वेशन रिजर्व (शाहबाद जंगल) में प्रस्तावित 1800 मेगावाट के वाटर पंप स्टोरेज प्रोजेक्ट (PSP) को लेकर विरोध तेज हो गया है। पर्यावरण संगठनों और जनसंगठनों ने परियोजना के खिलाफ आंदोलन की घोषणा की है। पीपल्स ग्रीन पार्टी (PGP), शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन, चंबल संसद और शाहबाद संरक्षण समिति ने संयुक्त मोर्चा बनाकर 20 नवंबर को जयपुर में मुख्यमंत्री आवास पहुंचकर सरकार से संवाद करने का ऐलान किया है।

जयपुर स्थित पीपल्स ग्रीन पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पार्टी अध्यक्ष डॉ. सुधांशु और शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के प्रमुख गब्बर यादव ने परियोजना को लेकर अपनी आपत्तियां सामने रखीं। उन्होंने कहा कि विकास के नाम पर शाहबाद क्षेत्र के पर्यावरण और जैव विविधता को नुकसान पहुंचने की आशंका है।

1.19 लाख पेड़ काटने का दावा

संगठनों ने दावा किया कि परियोजना के लिए 1 लाख 19 हजार 759 पेड़ों की कटाई प्रस्तावित है। उनका कहना है कि पूरे इकोसिस्टम को ध्यान में रखा जाए तो बड़ी संख्या में अन्य पेड़-पौधे और दुर्लभ जड़ी-बूटियां भी प्रभावित हो सकती हैं। संगठनों ने दावा किया कि इससे क्षेत्र की कार्बन अवशोषण क्षमता पर भी असर पड़ेगा।

500 गांवों की आजीविका प्रभावित होने की आशंका

चंबल संसद के अध्यक्ष बृजेश विजय और जल क्रांतिकारी रोबिन सिंह ने कहा कि परियोजना से शाहबाद और आसपास के करीब 500 गांवों की खेती, पानी और आजीविका प्रभावित होने की आशंका है। उन्होंने परियोजना में कुनो नदी के पानी को लिफ्ट कर रीसायकल करने की योजना का भी विरोध किया। संगठनों का दावा है कि इससे नदी के प्राकृतिक बहाव और क्षेत्र के भूजल स्तर पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जंगल पर निर्भर सहरिया आदिवासी समुदाय और स्थानीय किसानों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।

वन्यजीवों और चीता कॉरिडोर को लेकर भी चिंता

शाहबाद जंगल बचाओ आंदोलन के प्रमुख गब्बर यादव ने कहा कि शाहबाद का जंगल पैंथर, भालू, जरख, भेड़िए और गिद्ध समेत कई वन्यजीवों का प्राकृतिक आवास है। उन्होंने दावा किया कि यह क्षेत्र मध्य प्रदेश के कुनो नेशनल पार्क और राजस्थान के गांधी सागर क्षेत्र के बीच वन्यजीवों के आवागमन के लिहाज से भी महत्वपूर्ण है। संगठनों का कहना है कि परियोजना के तहत बिजलीघर और बांध जैसी संरचनाएं बनने से वन्यजीवों के आवागमन और क्षेत्र की जैव विविधता पर असर पड़ सकता है।

20 नवंबर को जयपुर पहुंचने का एलान

PGP अध्यक्ष डॉ. सुधांशु ने कहा कि यदि परियोजना को लेकर सरकार ने अपने फैसले पर पुनर्विचार नहीं किया और संबंधित सैद्धांतिक मंजूरियां वापस नहीं ली गईं तो 20 नवंबर को शाहबाद क्षेत्र से किसान, सहरिया आदिवासी और युवा जयपुर पहुंचेंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री आवास पर सरकार के साथ सीधे संवाद के जरिए परियोजना से जुड़े पर्यावरणीय और सामाजिक प्रभावों पर अपनी बात रखी जाएगी। संगठनों ने कहा कि उनका आंदोलन शांतिपूर्ण और लोकतांत्रिक तरीके से जारी रहेगा।

Updated on:
30 Sept 2026 06:29 pm
Published on:
30 Sept 2026 06:29 pm