
कहते हैें ताल मिले नदी के जल में,नदी मिले सागर में,लेकिन बारां की पावन सलिला परवन नदी सागर से मिलने को तरस रही है। पानी चोरों ने इतना पानी चोर लिया है कि यह नदी कईं जगह पर तलैया सी नजर आने लगी है।
हरनावदाशाहजी. क्षेत्र में बहने वाली परवन समेत अन्य नदी नालों के पानी का उपयोग सिंचाई कार्य में प्रयुक्त होने से नदी-नालों का जलस्तर कम होने लगा है। कई स्थानों पर नदी किनारे लगी मोटरें दिन रात सिंचाई के लिए अवैध रुप से जल दोहन में प्रयुक्त हो रही है। क्षेत्र की सबसे बड़ी परवन नदी में कई जगहों पर बड़े बड़े दह बने हुए है। जिनमें वर्ष पर्यंत पानी का भराव रहता आया है, लेकिन कुओं के गिरते जलस्तर के कारण नदी किनारे से लेकर आसपास के खेत मालिकों द्वारा नदी के पानी को ही लिफ्ट कर सिंचाई के लिए लिया जाने लगा है। ऐसे में नदी के हालात अब धीरे-धीरे बदलने लगे है। ऐसे में गर्मी के दिनों में पशुओं के लिए भी पेयजल संकट के हालात नजर आने लगते है।
रीतने लगे चैक डेम
परवन नदी के पानी को रोकने के लिए चेक डेम बनाए हुए है। बीलखेड़ा के निकट बनाए चेक डेम से पानी रोकने से यहां पर काफी पानी का भराव रहता है। इसका उदाहरण है कि कामखेड़ा जाने के लिए सबसे कम दूरी वाले मार्ग पर डेम के पानी का भराव रहने के कारण अब मार्ग बंद हो गया। जबकि आसपास के गांव वालों ने नाव के सहारे आना जाना बना रखा है। इन दिनों हो रहे जलदोहन के कारण जलस्तर काफी कम होने लगा है। एक चेक डेम कालाटोल गांव के निकट नदी में बना है। यहां पर भी दीपावली बाद तक अच्छा पानी रहता है, लेकिन किसानों की जरुरत के लिए अवैध रुप से निकासी के कारण रीतने जैसे हालात नजर आने लगते हैं।
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दिन रात चल रही मोंटरें
अकलेरा मार्ग स्थित पुलिया के निकट इन दिनों परवन नदी में लगी एक दर्जन से अधिक मोटरें दिन रात नदी का पानी खींच रही है। इससे आगे भी कई स्थानों पर लोगों ने सिंचाई के लिए व्यवस्थाएं कर रखी है। इधर ल्हासी नदी में भी इन दिनों पानी का बहाव है, लेकिन अवैध जल दोहन के चलते जलधार प्रभावित होने की आशंका है।