अघोषित विद्युत कटौती ने बिगाड़ा किसानों का गणित
भंवरगढ़. कस्बे सहित आसपास ग्रामीण अंचल में तीन सप्ताह से भी अधिक समय से बरसात नहीं हुई है। ऐसे में खेतों में खड़ी फसल सूखने लगी है। इधर बिजली की अघोषित कटौती किसानों की पीड़ा को दोगुना कर दिया है। कई किसानों ने खेतों में खड़ी धान की फसल की हंकाई कर दी है। कई ने फसल को भगवान के भरोसे छोड़ दिया है। जानकारी के अनुसार अगस्त माह के प्रथम सप्ताह में कस्बे सहित आसपास ग्रामीण अंचल के खेतों में खड़ी सोयाबीन एवं धान की फसल में खरपतवार नाशक दवा का स्प्रे बेअसर होने के बाद किसानों द्वारा मजदूरों से खरपतवार हटाने का कार्य करवाया गया था। इसकी लागत प्रति बीघा 15 सौ से 2 हजार रुपए तक इसकी लागत आई थी। तभी से बरसात नहीं होने के कारण किसानों के अरमान धुलते नजर आ रहे हैं।
आंखों के सामने बर्बाद हुई फसल
किसानों से मिली जानकारी के अनुसार कस्बे सहित आसपास ग्रामीण क्षेत्र के घट्टी, परानियां, बोरदा, बोरेन, गोरधनपुरा, जैतपुरा, डिकोंनिया, गजरोन, पीपल्दा, तलावड़ा ,रामनगर, रामपुरिया, विलासगढ़, फल्दी, कापड़ीखेड़ा, बांसथूनी सहित क्षेत्र के अन्य गांवो में जून के अंतिम, जुलाई के प्रथम सप्ताह में बड़े पैमाने पर सोयाबीन, उड़द, मक्का, धान ,सहित अन्य कई प्रकार की खरीफ की फसलों की बुवाई की थी। समय के साथ फसल की बढ़वार हुई, खरपतवार नाशक भी लगातार बढ़ता रहा। किसानों द्वारा कृषि विभाग के अधिकारियों की सलाह से खेतों में खरपतवार नाशक दवाओं का छिड़काव भी लगातार करवाया गया। ङ्क्षकतु इसके बावजूद अल्पवर्षा के कारण खेतों में फसल के साथ खरपतवार की बढ़वार किसानों के लिए सिरदर्द बन गई। इस दौरान दवाओं का अलग-अलग माध्यम से छिड़काव भी किया, ङ्क्षकतु खरपतवार नियंत्रण नहीं होने के कारण सब कुछ बेकार हो गया। बाद में फसलों में फूल आने लगे तो किसानों ने दवाओं का छिड़काव रोककर मजदूरों से निराई-गुड़ाई कराई। इसी के बाद से बरसात का दौर थम गया। तभी से तेज गर्मी का दौर शुरू हो गया है। इससे फसलें सूखने लगी हैं। किसान अब तक सब तरह की लागत खेतों में लगा चुका है।
बिजली कटौती से बढ़ रही परेशानी
अच्छी फसल की आस में खेतों में दिन-रात एक कर पानी पिलाने का जुगाड़ कर रहा है, ङ्क्षकतु अघोषित विद्युत कटौती ने किसानों का सुखचैन छीन रखा है। गत एक पखवाड़े से विद्युत तंत्र पूरी तरह गड़बड़ाने के कारण किसानों को पर्याप्त मात्रा में बिजली नहीं मिलने से हताशा है। किसानों ने विद्युत विभाग के उच्च अधिकारी व जिले के जनप्रतिनिधियों से पर्याप्त मात्रा में बिजली आपूर्ति की मांग करते हुए आंदोलन की चेतावनी दी है।