बरेली

13 साल तक अधूरा रहा सपना अब होगा पूरा… 300 बेड अस्पताल बनेगा सुपर स्पेशियलिटी, कल निरीक्षण करेगी टीम, सोलर प्लांट से मिलेगी राहत

शहर के लंबे समय से अधर में लटके 300 बेड अस्पताल को आखिरकार नई जिंदगी मिलने जा रही है। पीपीपी मोड पर इसे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में संचालित करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है।
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Mar 26, 2026
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बरेली। शहर के लंबे समय से अधर में लटके 300 बेड अस्पताल को आखिरकार नई जिंदगी मिलने जा रही है। पीपीपी मोड पर इसे सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के रूप में संचालित करने की प्रक्रिया अब अंतिम चरण में पहुंच गई है। शुक्रवार को लखनऊ से शासन स्तर की टीम अस्पताल का निरीक्षण करने पहुंचेगी, जो यहां की व्यवस्थाओं का जायजा लेकर संचालन की रूपरेखा तय करेगी।

लखनऊ से आने वाली टीम अस्पताल भवन, ओपीडी, लैब, उपकरणों और अन्य व्यवस्थाओं का गहन निरीक्षण करेगी। साथ ही यह भी देखा जाएगा कि सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के संचालन के लिए किन संसाधनों और स्टाफ की जरूरत होगी। निरीक्षण के बाद टीम अपनी रिपोर्ट शासन को सौंपेगी, जिसके आधार पर अंतिम निर्णय लिया जाएगा। करीब 13 साल पहले 69 करोड़ रुपये की लागत से इस अस्पताल का निर्माण शुरू हुआ था। भवन तैयार होने के बावजूद अब तक मरीजों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल सका। फिलहाल यहां केवल सामान्य ओपीडी, आंख, दांत की सेवाएं, एंटी रेबीज क्लिनिक और सीटी स्कैन जैसी सीमित सुविधाएं ही संचालित हो रही हैं। भर्ती व्यवस्था न होने से मरीजों को अब भी जिला अस्पताल पर निर्भर रहना पड़ रहा है।

जिला अस्पताल का कम होगा दबाव

अस्पताल के पूर्ण रूप से शुरू होने के बाद हजारों मरीजों को राहत मिलेगी और जिला अस्पताल पर बढ़ता दबाव भी कम होगा। स्वास्थ्य विभाग का मानना है कि सुपर स्पेशियलिटी सेवाएं शुरू होने से गंभीर बीमारियों का इलाज स्थानीय स्तर पर ही संभव हो सकेगा। अस्पताल में बिजली कटौती की समस्या को देखते हुए अब सोलर प्लांट लगाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया गया है। नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (नेडा) द्वारा रेस्को मॉडल के तहत सौर ऊर्जा परियोजना पर काम शुरू कर दिया गया है। बुधवार को अस्पताल में 450 सोलर प्लेट पहुंच चुकी हैं, जिन्हें जल्द स्थापित किया जाएगा।

एक महीने में पूरी होगी सोलर व्यवस्था

साइट इंजीनियर के अनुसार, सोलर इनवर्टर आने के बाद माउंटिंग स्ट्रक्चर तैयार किया जाएगा और बैटरी, केबलिंग, अर्थिंग समेत सभी तकनीकी व्यवस्थाएं स्थापित की जाएंगी। पूरी प्रक्रिया में करीब एक महीने का समय लगेगा। रेस्को मॉडल के तहत सारा खर्च निजी फर्म उठाएगी और 25 साल तक रखरखाव की जिम्मेदारी भी उसी की होगी। करीब एक साल पहले मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान इस अस्पताल को सुपर स्पेशियलिटी के रूप में विकसित करने के निर्देश दिए गए थे। इसके बाद से स्वास्थ्य विभाग ने तैयारी तेज कर दी। सीएमओ डॉ. विश्राम सिंह के मुताबिक, निरीक्षण के बाद अस्पताल संचालन को लेकर आगे की प्रक्रिया तेजी से पूरी की जाएगी।

Updated on:
26 Mar 2026 04:14 pm
Published on:
26 Mar 2026 04:14 pm