
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी।
Bareilly News: ईद-मिलादुन्नबी के मौके पर 26 अगस्त को देशभर में निकलने वाले जुलूस-ए-मोहम्मदी को लेकर बरेली से अहम फतवा जारी किया गया है। ऑल इंडिया मुस्लिम जमात के राष्ट्रीय अध्यक्ष मौलाना शहाबुद्दीन रजवी बरेलवी ने जुलूस में डीजे, बाजे, नाच-गाने, हुड़दंग और विदेशी झंडों के इस्तेमाल को नाजायज बताते हुए मुस्लिम नौजवानों से जुलूस को पूरी तरह शांतिपूर्ण, अनुशासित और शरीअत के मुताबिक निकालने की अपील की है।
सोमवार को जारी फतवे में मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने कहा कि जुलूस-ए-मोहम्मदी को गैर शरई गतिविधियों से पूरी तरह पाक-साफ रखा जाए। डीजे, बाजे, नाच-गाने, हंगामा और हुड़दंग जैसी गतिविधियों से बचा जाए। उनका कहना है कि जुलूस का मकसद पैगंबर-ए-इस्लाम की रहमत, अमन और भाईचारे की शिक्षाओं को लोगों तक पहुंचाना होना चाहिए। फतवे में जुलूस के दौरान दूसरे देशों के झंडे और बैनर लगाने से भी परहेज करने को कहा गया है। मौलाना ने भारतीय राष्ट्रीय ध्वज तिरंगे को प्राथमिकता देने की अपील की। उन्होंने हरे, चांद-सितारे और तलवार के निशान वाले कुछ झंडों को विदेशी मुल्कों से जुड़ा बताते हुए इनके इस्तेमाल से बचने को कहा।
मौलाना ने जुलूस में किसी भी तरह के असलहे के प्रदर्शन को गलत बताते हुए नकली तलवारें लेकर चलने से भी परहेज करने की नसीहत दी। उन्होंने कहा कि जुलूस ऐसा होना चाहिए जिससे किसी दूसरे संप्रदाय के व्यक्ति को परेशानी न हो और न ही किसी की धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचे। फतवे में खासतौर पर नौजवानों को बाइक पर तीन सवारी बैठाकर चलने, तेज आवाज में शोर मचाने और यातायात व्यवस्था प्रभावित करने वाली गतिविधियों से बचने की हिदायत दी गई है। मौलाना ने कहा कि जुलूस-ए-मोहम्मदी को शरीअत की रोशनी में ऐसा मिसाली बनाया जाए, जिससे अमन और भाईचारे का पैगाम जाए।
मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने डीजे के इस्तेमाल को लेकर विशेष चिंता जताई। उनका कहना है कि पिछले वर्षों में तेज आवाज वाले डीजे के कारण कई अप्रिय घटनाएं सामने आई हैं। अत्यधिक तेज आवाज से रास्ते में पड़ने वाले मकानों के दरवाजे-खिड़कियों को नुकसान पहुंचने और कमजोर दिल के लोगों की तबीयत बिगड़ने का खतरा रहता है। मौलाना ने मुस्लिम समाज, खासकर युवाओं से अपील की कि ईद-मिलादुन्नबी के जुलूस में ऐसा कोई काम न किया जाए जिससे कानून-व्यवस्था प्रभावित हो या किसी दूसरे समुदाय को परेशानी का सामना करना पड़े। जुलूस को पैगंबर-ए-इस्लाम की अमन, मोहब्बत और भाईचारे की तालीम का संदेश देने वाला बनाया जाए।
Updated on:
24 Aug 2026 08:01 pm
Published on:
24 Aug 2026 08:01 pm
