
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी।
Bareilly News: साइबर ठगी के लिए फर्जी आधार कार्ड और बैंक खातों का नेटवर्क चलाने के मामले में फतेहगंज पश्चिमी पुलिस ने एक और आरोपी को दबोच लिया है। पुलिस के मुताबिक जाली आधार कार्ड के सहारे बैंक खाते खुलवाए जाते थे और फिर इन खातों में साइबर ठगी से हासिल रकम मंगाई जाती थी। पैसा आते ही उसे निकालकर नेटवर्क से जुड़े लोग आपस में बांट लेते थे। इस मामले में पुलिस मोहम्मद जफर को पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है, अब रफीक भी पुलिस के हत्थे चढ़ गया है।
इस पूरे खेल की परतें दो अगस्त को खुलनी शुरू हुई थीं। साइबर टीम की जांच में सामने आया कि फर्जी आधार कार्ड तैयार कर उनके जरिए बैंक खाते खुलवाए जा रहे थे। आरोप है कि इन खातों का इस्तेमाल सामान्य लेनदेन के लिए नहीं, बल्कि साइबर ठगी से हासिल रकम मंगाने के लिए किया जाता था। इसी मामले में साइबर टीम के उपनिरीक्षक पंकज कुमार और उनकी टीम ने मोहम्मद जफर समेत तीन लोगों के खिलाफ फतेहगंज पश्चिमी थाने में मुकदमा दर्ज कराया था।
मुकदमा दर्ज होने के दिन ही पुलिस ने बहेड़ी के शेरनगर निवासी 26 वर्षीय मोहम्मद जफर को गिरफ्तार कर न्यायालय में पेश कर दिया था। इसके बाद पुलिस की नजर फरार चल रहे दूसरे आरोपियों पर टिक गई। जांच आगे बढ़ी तो धंतिया निवासी रफीक का नाम भी नेटवर्क की अहम कड़ी के रूप में सामने आया। पुलिस उसकी तलाश में लगातार दबिश दे रही थी। रविवार को पुलिस को रफीक की मौजूदगी की सूचना मिली। इसके बाद वरिष्ठ उपनिरीक्षक अशोक कुमार, उपनिरीक्षक विनोद कुमार शर्मा और हेड कांस्टेबल भूपेंद्र सिंह की टीम सक्रिय हुई। हाईवे से धंतिया जाने वाले मोड़ पर कब्रिस्तान के पास पुलिस ने घेराबंदी कर करीब 30 वर्षीय रफीक पुत्र अनीस खां को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस के मुताबिक पूछताछ में रफीक ने इस नेटवर्क को लेकर कई अहम बातें बताई हैं। उसका कहना है कि वह मोहम्मद जफर और ताहिर की मदद से फर्जी आधार कार्ड तैयार कराता था। इन दस्तावेजों के आधार पर बैंक खाते खुलवाए जाते और फिर उन्हीं खातों में साइबर ठगी की रकम मंगाई जाती थी। रकम खाते में पहुंचने के बाद उसे निकालकर आपस में बांट लिया जाता था। रफीक की गिरफ्तारी के बाद अब सबसे बड़ा सवाल उन बैंक खातों और साइबर ठगी के नेटवर्क का है, जिनसे रकम इन खातों तक पहुंचती थी। पुलिस के सामने यह पता लगाने की चुनौती है कि फर्जी दस्तावेजों के जरिए कितने खाते खुलवाए गए, उनमें कितनी रकम का लेनदेन हुआ और ठगी की रकम भेजने वाले साइबर अपराधियों से आरोपियों का संपर्क किस स्तर का था। मामले में ताहिर की भूमिका भी जांच के दायरे में है।
रफीक का नाम पहली बार धोखाधड़ी के किसी मामले में सामने नहीं आया है। पुलिस रिकॉर्ड के अनुसार उसके खिलाफ वर्ष 2016 में इज्जतनगर थाने में धोखाधड़ी, जालसाजी और आपराधिक साजिश समेत गंभीर धाराओं में मुकदमा दर्ज हुआ था। अब फतेहगंज पश्चिमी थाने में उसके खिलाफ बीएनएस की धारा 318(4), 61(2), 336(3), 338 और 340(2) के तहत दर्ज मामले में कार्रवाई की गई है। फतेहगंज पश्चिमी पुलिस अब इस साइबर फ्रॉड नेटवर्क की बाकी कड़ियां जोड़ने में जुटी है। प्रभारी निरीक्षक प्रवीन कुमार के नेतृत्व में कार्रवाई करने वाली टीम में वरिष्ठ उपनिरीक्षक अशोक कुमार, उपनिरीक्षक विनोद कुमार शर्मा और हेड कांस्टेबल भूपेंद्र सिंह शामिल रहे। गिरफ्तार रफीक को न्यायालय में पेश किया जा रहा है।
Updated on:
23 Aug 2026 06:46 pm
Published on:
23 Aug 2026 06:46 pm
