बरेली

दो बच्चों की शिक्षक मां, किसान का बेटा, संविदा कर्मी और चीफ इंजीनियर का बेटा बना PCS 

यूपी पीसीएस 2024 के परिणाम ने बरेली जिले के होनहार युवाओं की मेहनत को नया आसमान दे दिया है। इस बार सफलता की कहानी सिर्फ टॉपर्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एक मां, किसान का बेटा, संविदा कर्मचारी और नौकरी के साथ तैयारी करने वाले युवाओं की संघर्षगाथा भी शामिल है।

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Mar 31, 2026

बरेली। यूपी पीसीएस 2024 के परिणाम ने बरेली जिले के होनहार युवाओं की मेहनत को नया आसमान दे दिया है। इस बार सफलता की कहानी सिर्फ टॉपर्स तक सीमित नहीं रही, बल्कि इसमें एक मां, किसान का बेटा, संविदा कर्मचारी और नौकरी के साथ तैयारी करने वाले युवाओं की संघर्षगाथा भी शामिल है। किसी ने यूट्यूब से पढ़ाई की, तो किसी ने बिना कोचिंग के खुद को साबित किया।

दो बच्चों की मां बनी नायब तहसीलदार, पहले ही प्रयास में कमाल

दुर्गा नगर निवासी 34 वर्षीय आकांक्षा सक्सेना ने अपने पहले ही प्रयास में नायब तहसीलदार बनकर मिसाल पेश की है। 18 साल की उम्र में शादी, दो बच्चों की जिम्मेदारी और परिवार की चुनौतियों के बीच उन्होंने हार नहीं मानी। पति और ससुर के प्रोत्साहन से पढ़ाई जारी रखी और बिना किसी कोचिंग के यूट्यूब के जरिए तैयारी कर सफलता हासिल की। केदारनाथ त्रासदी में ससुर के लापता होने के बाद भी उन्होंने हिम्मत नहीं हारी।

UPSC में नहीं मिली सफलता, PCS में बन गई BDO

सनराइज एन्क्लेव की 26 वर्षीय उपासना मार्छाल का चयन खंड विकास अधिकारी (BDO) पद पर हुआ है। यूपीएससी में असफलता के बाद उन्होंने हार नहीं मानी और पीसीएस पर फोकस किया। दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की। दिल्ली विश्वविद्यालय से बीटेक करने वाली उपासना ने बिना कोचिंग के तैयारी की और सिर्फ टेस्ट सीरीज के सहारे खुद को मजबूत किया।

किसान के बेटे ने किया कमाल, बने असिस्टेंट कमिश्नर

गांव गुलड़िया अरिल के किसान परिवार से आने वाले शैलेंद्र कुमार ने पहले ही प्रयास में असिस्टेंट कमिश्नर (वाणिज्य कर) बनकर जिले का नाम रोशन किया। सीमित संसाधनों के बावजूद परिवार के समर्थन और खुद की मेहनत से उन्होंने यह मुकाम हासिल किया। उनकी मां पढ़ी-लिखी नहीं हैं, लेकिन बेटे को पढ़ाने के लिए हमेशा प्रेरित करती रहीं।

9 साल की मेहनत लाई रंग, अब अधिकारी बने अतहर

इज्जतनगर निवासी अतहर जमाल खान का चयन पंचायती राज विभाग में कार्य अधिकारी पद पर हुआ है। उन्होंने 2015 से तैयारी शुरू की थी। कई बार इंटरव्यू तक पहुंचे लेकिन सफलता नहीं मिली। कोरोना और संसाधनों की कमी के बावजूद उन्होंने हार नहीं मानी और आखिरकार इस बार सफलता हासिल की।

वर्क फ्रॉम होम के साथ तैयारी, कुशाग्र बने नायब तहसीलदार

25 वर्षीय कुशाग्र प्रकाश ने नौकरी के साथ पीसीएस की तैयारी करते हुए पहले ही प्रयास में नायब तहसीलदार पद हासिल किया। आईआईटी धनबाद से इंजीनियरिंग करने वाले कुशाग्र ने वर्क फ्रॉम होम के दौरान समय का सही इस्तेमाल किया और लक्ष्य हासिल किया।

42 की उम्र में सफलता, तीसरे प्रयास में जीती बाजी

बहेड़ी निवासी 42 वर्षीय सुरेश बाबू ने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल कर साबित किया कि उम्र सिर्फ एक संख्या है। संविदा पर पढ़ाने वाले सुरेश ने पारिवारिक संकट और आर्थिक मुश्किलों के बावजूद हार नहीं मानी। दो बार इंटरव्यू तक पहुंचे, लेकिन इस बार मेहनत रंग लाई।

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