नगर निगम के विकास कार्यों में रोड़ा डालने वाले अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार शुक्ला को शासन ने मुख्यालय अटैच कर दिया है। नगर निकाय निदेशालय (टेक्निकल सेल) लखनऊ के मुख्य अभियंता कमलजीत को जांच अधिकारी बनाया गया है। सात दिन में रिपोर्ट मांगी है।
बरेली। नगर निगम के विकास कार्यों में रोड़ा डालने वाले अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार शुक्ला को शासन ने मुख्यालय अटैच कर दिया है। नगर निकाय निदेशालय (टेक्निकल सेल) लखनऊ के मुख्य अभियंता कमलजीत को जांच अधिकारी बनाया गया है। सात दिन में रिपोर्ट मांगी है। अधिशासी अभियंता पर जनप्रतिनिधियों से लेकर ठेकेदारों ने शिकायत की थी। भ्रष्टाचार से लेकर अनियमितता, मनमानी और उच्चाधिकारियों के आदेशों की अवहेलना के आरोप भी लगे हैं।
नगर आयुक्त की रिपोर्ट में भी खुलासा
विकास कार्यों में अड़चन लगाने और अधिकारियों के आदेशों को नजरअंदाज करने पर नगर आयुक्त निधि गुप्ता वत्स ने कई बार अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार शुक्ला को चेतावनी दी थी। बार बार वही गलियां किए जाने और कोई सुधार न लाने पर नगर आयुक्त ने 26 जुलाई का नगर विकास अनुभाग-4 के प्रमुख सचिव अमृत अभिजात को पत्र भेजा था।
इस पत्र में बताया गया कि अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार शुक्ला द्वारा अपने कार्यों में लापरवाही, उदासीनता दर्शाते हुए अपने पदीय दायित्वों का निर्वहन निष्ठापूर्वक न किए जाने के कारण जन विकास के कार्य प्रभावित हुए है। उच्चाधिकारियों के आदेशों के अवहेलना की जाती है। जनप्रतिनिधियों के साथ उचित व्यवहार नहीं किया जाता है, जो कि एक सरकारी कर्मचारी के आचरण के सर्वथा विपरीत होने के साथ घोर अनुशासनहीनता है।
ठेकेदारों का भुगतान रोककर अटका दिये विकास कार्य
नगर निगम में हर साल 100 करोड़ रुपये विकास कार्यो पर खर्च होते थे। अधिशासी अभियंता दिलीप कुमार शुक्ला विकास कार्यों में अड़ंगा लगाने में मुख्य किरदार के रूप में रहे हैं। नगर निगम कार्यकारिणी समिति से लेकर बोर्ड में अधिशासी अभियंता के खिलाफ विरोध हुआ। विधायक, मेयर, पार्षदों ने विरोध कर उनकी लिखित शिकायत की। इसके बाद भी दिलीप कुमार शुक्ला में कोई बदलाव नहीं हुआ।
उच्च अधिकारियों से लेकर मेयर, पार्षदों की बातों को अनसुना करते रहे। विकास के कामों के टेंडर प्रक्रिया को अटकाते रहे। टेंडर निरस्त कराने में उन्हें महारथ हासिल रही। मेयर डा. उमेश गौतम ने बताया कि दिलीप कुमार शुक्ला ने नगर निगम को काफी क्षति पहुंचाई है। विकास के कामों में हमेशा उन्होंने रूकावट पैदा की। टेंडर प्रक्रिया नहीं होने में अहम भूमिका रही। जो भी ऐसी कार्यशैली के अधिकारी हैं जो जनहित में काम में रूकावट बनते हैं उनके खिलाफ कार्रवाई होना चाहिए।