कुल की रस्म के बाद सज्जादानशीन अहसन मियां ने मुल्क व मिल्लत के लिए दुआ की।
बरेली। आला हजरत का 100वां उर्स ए रज़वी कुल शरीफ की रस्म अदा होने के साथ ही समाप्त हो गया। आला हजरत के कुल शरीफ में शामिल होने के लिए लाखों की तादात में देश-विदेश से जायरीन बरेली पहुंचे थे। उर्स के अंतिम दिन पूरी बरेली में आला हजरत के दीवानों के जत्थे रज़ा के नारों साथ उर्स स्थल इस्लामियां मैदान से लेकर मदरसा जामियातुर्रजा तक जमे नजऱ आये। उर्स की सबसे बड़ी रस्म का आगाज़ ठीक 2 बज कर 38 मिनट पर दरग़ाह प्रमुख सुब्हान रज़ा खान सुब्हानी मियां की सरपरस्ती और सज्जादानशीन अहसन रज़ा खान कादरी की कयादत में हुई। इनसे पहले सदसाला उर्स में आये उलेमाओं ने आला हजरत की जि़न्दगी, उनके इल्म, नातिया कलाम पर रौशनी डाली। जिसमें देश से ही नहीं विदेश से आये उलेमा भी शरीक हुए। अमेरिका, अफ्रीका, बांग्लादेश, पूरे भारत से अलग-अलग शहरों से इस्लामिक स्कॉलर ने आला हजरत पर तकऱीर की। कुल की रस्म के बाद सज्जादानशीन अहसन मियां ने मुल्क व मिल्लत के लिए दुआ की।
पूरी दुनिया में लाइव सुना गया उर्स का कार्यक्रम
100 वें उर्स-ए-रज़वी के मौके पर आलाहज़रत के ऐसे मुरीद और अकीदतमंद जो किसी मजबूरी के तहत उर्स-ए-रज़वी में शामिल नहीं हो पाये उनके लिए दरगाह प्रमुख मौलाना मोहम्मद सुब्हान रज़ा खां ‘‘सुब्हानी मियां’’ ने लाइव आॅडियो की व्यवस्था की थी इसकी ज़िम्मेदारी सुब्हानी मियां ने दरगाहे आलाहज़रत स्थित आई0टी0 सेल के अध्यक्ष नबीरा-ए-आलाहज़रत मोहम्मद जुबैर रज़ा खां कादरी को दी थी।नबीरा-ए-आलाहज़रत मोहम्मद जुबैर रज़ा खां कादरी ने बताया कि 100 वां उर्स होने के नाते लाइव आॅडियो प्रोग्राम के लिए खास इन्तेज़ाम किए गये थे। लाइव प्रोग्राम तीनों दिन पूरी कामयाबी के साथ चला। लाइव प्रोग्राम को हिन्दुस्तान के अलावा माॅरिशस, इंग्लैण्ड, अमेरिका, दुबई, सउदी अरब, पकिस्तान, बंग्लादेश, नेपाल, ईराक, ईरान सहित बहुत से मुल्कों में सुना गया।
सुब्हानी मियां ने किया किताबों का विमोचन
दरगाह प्रमुख हजऱत मौलाना सुब्हान रज़ा खान (सुब्हानी मियां) ने दर्जनों किताबों का इजरा (विमोचन) कॉन्फ्रेंस में किया। जिसमें मुफ़्ती सलीम नूरी की लिखी नुजूम ए हिदायत, चालीस हदीस, फतावा हामिदिया का उर्दू तर्जुमा के अलावा माहनामा आला हजऱत का सदसाला स्पेशल अंक, मुफ़्ती अय्यूब खान, मुफ़्ती हनीफ खान आदि की लिखी किताबें शामिल रहीं।