बहेड़ी क्षेत्र स्थित भूड़िया कॉलोनी, ग्राम उतरसिया सामुखिया के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अव्यवस्थाओं के खिलाफ छात्राओं का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। रविवार सुबह से करीब 70 छात्राएं भूख हड़ताल पर बैठ गईं।
बरेली। बहेड़ी क्षेत्र स्थित भूड़िया कॉलोनी, ग्राम उतरसिया सामुखिया के कस्तूरबा गांधी आवासीय बालिका विद्यालय में अव्यवस्थाओं के खिलाफ छात्राओं का गुस्सा आखिरकार फूट पड़ा। रविवार सुबह से करीब 70 छात्राएं भूख हड़ताल पर बैठ गईं। अचानक हुए इस घटनाक्रम से विद्यालय प्रशासन में हड़कंप मच गया और जिम्मेदारों की कार्यशैली पर सवाल खड़े हो गए।
विद्यालय में 140 छात्राएं पंजीकृत हैं, लेकिन वर्तमान में केवल 70 छात्राएं ही रह रही हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर आधी छात्राएं कहां हैं? स्थानीय लोगों का कहना है कि बदहाल व्यवस्थाओं के कारण अभिभावक अपनी बेटियों को यहां भेजने से कतरा रहे हैं। आवासीय विद्यालय की हालत यह है कि 70 छात्राओं के लिए मात्र 40 बेड उपलब्ध हैं। बाकी छात्राओं को फर्श पर सोना पड़ रहा है। छात्राओं का कहना है कि न तो पर्याप्त बिस्तर हैं और न ही रहने लायक माहौल। यह स्थिति तब है जब यह विद्यालय विशेष रूप से बालिकाओं के सुरक्षित और सम्मानजनक आवास के लिए संचालित किया जाता है।
छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें समय पर बिजली, पानी, भोजन और स्टेशनरी तक उपलब्ध नहीं कराई जा रही। पीने के पानी की गंभीर किल्लत बनी हुई है। बार-बार बिजली कटौती से पढ़ाई प्रभावित हो रही है। उनका कहना है कि कई बार शिकायत की गई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। आखिरकार मजबूर होकर उन्हें भूख हड़ताल का रास्ता अपनाना पड़ा। विद्यालय में आठ शिक्षक तैनात हैं, जिनमें पांच पूर्णकालिक और तीन अंशकालिक हैं। छात्राओं ने विद्यालय इंचार्ज संगीता भास्कर पर लापरवाही का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि पढ़ाई और रहन-सहन की बुनियादी जरूरतों की अनदेखी की जा रही है।
मामले की जानकारी मिलते ही ग्रामीण और शिक्षक मौके पर पहुंचे। समझाने-बुझाने के बाद छात्राओं ने भूख हड़ताल समाप्त कर दी। ग्राम प्रधान संदीप सिंह ने दो दिन के भीतर खराब हेडपंप ठीक कराने का आश्वासन दिया है। इस दौरान अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद के प्रद्युम्न गंगवार भी कार्यकर्ताओं के साथ विद्यालय पहुंचे और तत्काल व्यवस्थाएं दुरुस्त करने की मांग की। पूरा मामला सामने आने के बाद विद्यालय प्रशासन सक्रिय हुआ। इंचार्ज संगीता भास्कर का कहना है कि छात्राओं की समस्याओं को गंभीरता से लिया गया है और जल्द ही सभी कमियां दूर की जाएंगी। हालांकि बड़ा सवाल यही है कि जब तक छात्राएं भूख हड़ताल पर नहीं बैठीं, तब तक जिम्मेदार क्यों नहीं जागे।