पीलीभीत के डीआईओएस कार्यालय के चपरासी के करोड़ों रुपये के खेल ने अब बरेली के बड़े बिल्डरों को कटघरे में ला खड़ा किया है। JHM इंफ्रा और ओरिका होम बिल्डर की संपत्तियां जांच के घेरे में आ गई हैं।
बरेली। पीलीभीत के डीआईओएस कार्यालय के चपरासी के करोड़ों रुपये के खेल ने अब बरेली के बड़े बिल्डरों को कटघरे में ला खड़ा किया है। JHM इंफ्रा और ओरिका होम बिल्डर की संपत्तियां जांच के घेरे में आ गई हैं। मामला अब इतना गंभीर हो चुका है कि इसकी गूंज हाईकोर्ट तक पहुंचने की संभावना जताई जा रही है। रेरा, बीडीए और जिला प्रशासन की संयुक्त जांच ने बिल्डर लॉबी में हड़कंप मचा दिया है।
पीलीभीत प्रशासन की शुरुआती जांच में सामने आया है कि डीआईओएस कार्यालय में तैनात चपरासी इलहाम शम्सी ने संदिग्ध तरीके से करोड़ों रुपये का लेन-देन किया। इसी धन को बरेली के बिल्डरों तक पहुंचाने के आरोप लगे हैं। JHM इंफ्रा के खाते में करीब 90 लाख रुपये ओरिका होम बिल्डर के खाते में 17.18 लाख रुपये ट्रांसफर, यहीं से पूरे रियल एस्टेट नेटवर्क पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच में यह भी सामने आया है कि इन बिल्डरों ने बरेली में कई अपार्टमेंट और छोटी कॉलोनियां विकसित कीं, लेकिन कई खरीदारों को कब्जा तक नहीं दिया गया। लोगों से मोटी रकम लेने के बाद भी फ्लैट अधूरे या विवादित बताए जा रहे हैं। आशंका जताई जा रही है कि अवैध धन को खपाने की जल्दबाजी में कई निर्माण बरेली विकास प्राधिकरण (BDA) की मंजूरी के विपरीत किए गए। बीडीए के संयुक्त सचिव दीपक कुमार ने साफ कहा है कि अब इन निर्माणों की गहन जांच की जाएगी।
मामले में अब तीन स्तर पर जांच शुरू हो चुकी है—
तीनों एजेंसियों की कार्रवाई से बिल्डरों की मुश्किलें बढ़ती जा रही हैं।
प्रकरण में JHM इंफ्रा के जयदीप लुनियाल, हरीश अरोरा, मंसूर खान और ओरिका होम बिल्डर के ईशान अग्रवाल, प्रसून चौहान के नाम सामने आए हैं। जांच जैसे-जैसे आगे बढ़ रही है, वैसे-वैसे और बड़े खुलासों की आशंका जताई जा रही है। पूरा मामला पीलीभीत के डीआईओएस कार्यालय से जुड़े चपरासी इलहाम शम्सी से शुरू हुआ, जिसने 38 खातों में करोड़ों का संदिग्ध लेन-देन किया। अब यही पैसा बरेली के रियल एस्टेट में खपाने की बात सामने आने से मामला और गंभीर हो गया है।