यूजीसी के नए नियमों को लेकर गुरुवार को कई संगठन सड़कों पर उतर आए। कलेक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शन करते हुए संगठनों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपे। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी की गई।
बरेली। यूजीसी के नए नियमों को लेकर गुरुवार को कई संगठन सड़कों पर उतर आए। कलेक्ट्रेट गेट पर प्रदर्शन करते हुए संगठनों ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन जिलाधिकारी के माध्यम से सौंपे। इस दौरान कलेक्ट्रेट परिसर और आसपास भारी पुलिस बल तैनात रहा। प्रदर्शन के दौरान जमकर नारेबाजी की गई।
प्रदर्शन को देखते हुए कलेक्ट्रेट परिसर में पुलिस बल तैनात रहा। खुद सीओ प्रथम आशुतोष शिवम कमान संभाले रहे। पूरे कार्यक्रम के दौरान प्रशासन सतर्क रहा। प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, हालांकि नारेबाजी के कारण माहौल कुछ समय के लिए गरमाया रहा।
राष्ट्रीय सेवा संघ के पदाधिकारियों ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए नए नियमों का कड़ा विरोध किया। संगठन ने कहा कि शिक्षा से जुड़ी सुविधाएं जाति के आधार पर नहीं, बल्कि आर्थिक रूप से कमजोर लोगों को मिलनी चाहिए। पदाधिकारियों का कहना था कि हर जाति और धर्म में गरीब हैं और हर वर्ग में सक्षम लोग भी मौजूद हैं, इसलिए किसी जाति विशेष को प्राथमिकता देना गलत है। उन्होंने आरोप लगाया कि नए नियमों से समाज में आपसी भेदभाव और वैमनस्य बढ़ेगा। संगठन ने नियमों को तत्काल वापस लेने की मांग की।
राजपूत करणी सेना ने प्रधानमंत्री को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए नए नियमों को समाज के लिए घातक बताया। संगठन के नेताओं ने कहा कि यह व्यवस्था समाज को बांटने का काम करेगी और शिक्षा के माहौल को भी प्रभावित करेगी। उन्होंने कहा कि यह कदम राजनीति से प्रेरित प्रतीत होता है, जिससे सामाजिक सौहार्द बिगड़ सकता है। करणी सेना ने सरकार से नियमों को वापस लेने की मांग की।
भीम आर्मी भारत एकता मिशन ने राष्ट्रपति को संबोधित ज्ञापन सौंपते हुए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के नए नियमों का समर्थन किया। संगठन ने कहा कि यह नियम उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता, सामाजिक न्याय और सम्मान सुनिश्चित करने की दिशा में जरूरी कदम है। भीम आर्मी के पदाधिकारियों ने कहा कि वर्षों से अनुसूचित जाति, जनजाति, पिछड़ा वर्ग, अल्पसंख्यक, महिलाओं और दिव्यांग विद्यार्थियों के साथ भेदभाव की शिकायतें सामने आती रही हैं। नए नियमों से ऐसे मामलों पर रोक लगेगी। संगठन ने मांग की कि यह व्यवस्था देश के सभी उच्च शिक्षण संस्थानों में लागू की जाए और लंबित पदों को भरा जाए।