
Bareilly Stampede News: रक्षाबंधन के मौके पर बरेली में आयोजित एक कार्यक्रम उस समय हादसे में बदल गया, जब बड़ी संख्या में महिलाओं के मंच की ओर बढ़ने से अफरा-तफरी मच गई। भीड़ के दबाव में एक 45 वर्षीय महिला की मौत हो गई, जबकि तीन अन्य महिलाएं घायल हो गईं। घटना गुरुवार दोपहर बरेली क्लब ग्राउंड में आयोजित कार्यक्रम की है।
यह कार्यक्रम बरेली के मेयर उमेश गौतम और उनके बेटे पार्थ गौतम की ओर से आयोजित किया गया था। कार्यक्रम में शहर और आसपास के इलाकों से बड़ी संख्या में महिलाएं पहुंची थीं। आयोजकों ने इस साल करीब 20 हजार महिलाओं को आमंत्रित किया था। पिछले साल यह संख्या लगभग 15 हजार बताई गई थी। महिलाओं के लिए गिफ्ट और भोजन की व्यवस्था भी की गई थी। उनके साथ पुरुषों और बच्चों के पहुंचने से भीड़ और बढ़ गई।
कार्यक्रम सुबह करीब 10 बजे शुरू हुआ। शुरुआती कई घंटों तक सब कुछ सामान्य रहा। महिलाएं मेयर और उनके बेटे को राखी बांधने के लिए कार्यक्रम स्थल पर पहुंचती रहीं। बताया जा रहा है कि दोपहर करीब 3 बजे मंच की ओर जाने वाली महिलाओं की संख्या अचानक बढ़ गई। बड़ी संख्या में लोग एक साथ आगे बढ़ने लगे, जिससे भीड़ में धक्का-मुक्की और अफरा-तफरी की स्थिति बन गई। मंच से लोगों से शांति बनाए रखने और धक्का-मुक्की न करने की अपील भी की गई, लेकिन भीड़ का दबाव कम नहीं हो सका। इसी दौरान कई महिलाएं भीड़ में फंस गईं।
हादसे में मधु नाम की 45 वर्षीय महिला गंभीर रूप से घायल हो गईं। वह पीलीभीत बाईपास रोड स्थित चंद्रगुप्त पुरम की रहने वाली थीं और पूर्व सैन्यकर्मी भगवान सिंह की पत्नी थीं। परिजनों के मुताबिक, मधु अपने मोहल्ले की कुछ अन्य महिलाओं के साथ कार्यक्रम में शामिल होने पहुंची थीं। भीड़ में फंसने के बाद उनकी हालत बिगड़ गई। उन्हें इलाज के लिए मिशन अस्पताल ले जाया गया, लेकिन अस्पताल पहुंचने से पहले ही उन्होंने दम तोड़ दिया। डॉक्टरों ने जांच के बाद उन्हें मृत घोषित कर दिया। खास बात यह है कि बरेली क्लब से मिशन अस्पताल की दूरी दो किलोमीटर से भी कम है, लेकिन महिला को बचाया नहीं जा सका।
घटना में तीन अन्य महिलाएं भी घायल हुईं। उन्हें जिला अस्पताल ले जाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद सभी को छुट्टी दे दी गई। मधु के भाई अनेश सिंह का आरोप है कि कार्यक्रम में आने वाली भीड़ के हिसाब से सुरक्षा और भीड़ को नियंत्रित करने के पर्याप्त इंतजाम नहीं किए गए थे। उनका कहना है कि उनकी बहन सामान्य तौर पर कार्यक्रम में शामिल होने गई थीं, लेकिन भीड़ के बीच फंसने से उनकी जान चली गई।
इस घटना ने बड़े सार्वजनिक आयोजनों में क्राउड मैनेजमेंट और सुरक्षा व्यवस्था को लेकर सवाल खड़े कर दिए हैं। इस बार कार्यक्रम में करीब 20 हजार महिलाओं को बुलाया गया था, जबकि पिछले साल लगभग 15 हजार महिलाएं शामिल हुई थीं। इसके अलावा उनके साथ आए पुरुषों और बच्चों की वजह से वास्तविक भीड़ और ज्यादा हो गई।