Bareilly Tourism 2025: उत्तर प्रदेश सरकार ने बरेली के पौराणिक स्थल अहिच्छत्र को महाभारत सर्किट अंतर्गत विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दी है। 2 करोड़ रुपये की स्वीकृति के साथ यह स्थल धार्मिक पर्यटन का नया केंद्र बनेगा। यहाँ महाभारत कालीन इतिहास, जैन और बौद्ध धरोहर का संगम देखने को मिलेगा।
Ahichhatra to Shine on Mahabharata Circuit: उत्तर प्रदेश सरकार ने पर्यटन को नई उड़ान देने की दिशा में एक और बड़ा कदम उठाया है। प्रदेश के पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने शनिवार को जानकारी दी कि बरेली जिले के पौराणिक स्थल अहिच्छत्र को महाभारत सर्किट अंतर्गत विकसित करने की महत्वाकांक्षी योजना को मंजूरी दे दी गई है। इसके लिए 2 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है। सरकार का मानना है कि इस निर्णय से बरेली धार्मिक पर्यटन के मानचित्र पर और अधिक मजबूती से स्थापित होगा तथा राष्ट्रीय-अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिले की विशिष्ट पहचान बनेगी।
अहिच्छत्र का ऐतिहासिक और धार्मिक महत्व अत्यंत गहरा है। प्राचीन ग्रंथों में इसे उत्तर पांचाल की राजधानी बताया गया है। महाभारत कालीन इतिहास से जुड़े इस नगर ने समय-समय पर अनेक राजवंशों का शासन देखा है। द्वापर युग के बाद यहाँ पर गुप्त, पाल और सेन राजाओं का भी आधिपत्य रहा। पर्यटन मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “अहिच्छत्र एक ऐसा स्थल है जो हर युग में गौरवशाली रहा है। हमारी सरकार का उद्देश्य इसे आधुनिक सुविधाओं से सुसज्जित कर पर्यटन मानचित्र पर इसकी विशिष्ट पहचान स्थापित करना है।”
अहिच्छत्र की पुरातात्विक खुदाई 19वीं और 20वीं शताब्दी में होती रही। इन उत्खननों में अनेक दुर्लभ और बहुमूल्य अवशेष मिले हैं, जिनसे यह सिद्ध होता है कि प्राचीन समय में यह नगर एक समृद्ध व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र रहा। खुदाई से प्राप्त वस्तुएं आज देशभर के अलग-अलग संग्रहालयों में संरक्षित हैं। वर्तमान में भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग (एएसआई) ने अहिच्छत्र को संरक्षित क्षेत्र घोषित किया हुआ है।
मंत्री जयवीर सिंह ने कहा, “पर्यटन के बढ़ते आँकड़े स्थानीय अर्थव्यवस्था और रोजगार के नए अवसर खोल रहे हैं। बरेली को धार्मिक पर्यटन के प्रमुख गंतव्य के रूप में विकसित करना हमारी प्राथमिकता है।”
बरेली मुख्यालय से लगभग 50 किलोमीटर दूर आंवला तहसील के रामनगर क्षेत्र में स्थित अहिच्छत्र का किला आज भी उस दौर के वैभव और स्थापत्य कला का साक्षी है। इसकी भव्यता और वास्तुकला हर आगंतुक को आकर्षित करती है।
बरेली को “धार्मिक पर्यटन का संगम” कहा जाए तो गलत नहीं होगा। यहाँ हिन्दू, जैन और बौद्ध , सभी धर्मों से जुड़े पवित्र स्थल मौजूद हैं। सरकार का प्रयास है कि इन स्थलों को विकसित कर उत्तर प्रदेश को विश्व पर्यटन मानचित्र पर और मजबूत स्थान दिलाया जाए। पर्यटन मंत्री ने कहा, “धार्मिक पर्यटन के क्षेत्र में उत्तर प्रदेश निरंतर अग्रणी बन रहा है। अयोध्या, काशी, मथुरा के साथ अब बरेली का अहिच्छत्र भी महाभारत सर्किट की विशिष्ट पहचान बनेगा।”