मुकद्दस महीने रमज़ान के मुकम्मल होने के बाद ईद-उल-फितर का चांद जैसे ही खुशी की पैग़ाम लेकर आया, बरेली की फिज़ा इबादत, मोहब्बत और भाईचारे से महक उठी।
बरेली। मुकद्दस महीने रमज़ान के मुकम्मल होने के बाद ईद-उल-फितर का चांद जैसे ही खुशी की पैग़ाम लेकर आया, बरेली की फिज़ा इबादत, मोहब्बत और भाईचारे से महक उठी। सुबह की पहली रोशनी के साथ ही छोटे-बड़े, बुजुर्ग और नौजवान नए लिबास में सजकर अल्लाह के घर की तरफ निकल पड़े। हर तरफ ईद मुबारक की सदाएं, मुस्कुराते चेहरे और दिलों में शुक्राने का जज़्बा नजर आया।
शहर की मुख्य नमाज़ बाकरगंज स्थित ईदगाह में सुबह 10:30 बजे अदा की गई, जहां काज़ी-ए-हिंदुस्तान मुफ्ती असजद रज़ा क़ादरी (असजद मियां) ने नमाज़ पढ़ाई। नमाज़ के बाद खुत्बा हुआ, जिसमें मुल्क-ए-हिंदुस्तान की तरक्की, कौम की सलामती और मस्जिद-ए-अक्सा व फलस्तीन के मजलूमों के लिए खुसूसी दुआ की गई। हजारों हाथ जब एक साथ उठे तो माहौल रूहानी हो उठा, आंखें नम थीं और दिल सुकून से भरे हुए।
इमामों ने अपने खुत्बे में फरमाया कि ईद सिर्फ खुशी का दिन नहीं, बल्कि रमज़ान की इबादतों का इनाम है। जिस तरह रोजेदारों ने पूरे महीने खुद को गुनाहों से बचाकर रखा, उसी तरह बाकी जिंदगी भी नेक राह पर गुजारने की नसीहत दी गई। उन्होंने कहा कि ईद खुशियों का दिन है, मगर यह भी सोचने का वक्त है कि हमारी इबादतें कबूल हुईं या नहीं।
नमाज़ के बाद हर तरफ मोहब्बत का मंज़र दिखा। लोग एक-दूसरे से गले मिले, ईद मुबारक कहकर दिलों की दूरियां मिटाईं। बच्चों के चेहरों पर ईदी की खुशी झलक रही थी, तो बुजुर्गों की आंखों में शुक्राने की चमक थी। घरों में सेवइयों और पकवानों की खुशबू के साथ दावतों का दौर भी शुरू हो गया।
ईद की नमाज़ के बाद बड़ी तादाद में लोग कब्रिस्तानों की ओर भी पहुंचे। अपने बुजुर्गों और अजीजों की कब्र पर फातिहा पढ़कर ईसाले सवाब किया गया। यह मंज़र बता रहा था कि ईद सिर्फ खुशी नहीं, बल्कि अपनों को याद करने और दुआ करने का भी दिन है।
बरेली की 176 ईदगाहों और 1369 मस्जिदों में ईद की नमाज़ अदा की गई। सबसे पहले बाजार संदल खान स्थित दरगाह वली मियां में नमाज़ हुई, इसके बाद दरगाह ताजुश्शरिया, शाह शराफत मियां, शाहदाना वली, रफीक-उल-औलिया, जामा मस्जिद, नासिर मियां (नौमहला मस्जिद), हबिबिया, नूरानी और कचहरी वाली मस्जिद समेत तमाम इबादतगाहों में नमाज़ का सिलसिला चलता रहा। सबसे आखिर में दरगाह आला हजरत की रज़ा मस्जिद में सुबह 11 बजे मुफ्ती ज़हीम रज़ा ने नमाज़ अदा कराई।
जमात रज़ा मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान (फरमान मियां) ने कहा कि रमज़ान की तरह ईद के बाद भी इबादत और इंसानियत का रास्ता जारी रखना चाहिए। उन्होंने गरीबों का ख्याल रखने और मुल्क में अमन-भाईचारा कायम रखने की अपील की। ईदगाह में क़ाज़ी ए हिंदुस्तान के दामाद व जमात रज़ा मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव फरमान हसन खान (फरमान मिया) ने देशभर के लोगो को ईद की मुबारकबाद पेश की ईदगाह में मौजूद लोगो से ईद मिली और इसके साथ ही देशवासियों से अपील की कि आपस में मिलजुल कर व भाईचारा कायम रखें यही हमारे मुल्क की रिवायत भी रही है फ़रमान मियां ने नमाज़ अदा करने के बाद कहा कि अल्लाह ने अपने बंदों को तीस रोजो को इनाम ईद के रूप में अता किया। रोजदारो ने जिस तरह अपने आप को रमज़ान भर हर बुरे काम से रोके रखा उसी तरह बाकी बची ज़िंदगी भी इसी तरह गुजारे।
ईदगाह और मस्जिदों में बेहतर इंतजाम देखने को मिले। ईदगाह कमेटी के खलील अहमद, हबीब हुसैन, महताब अली, शादाब हुसैन, महबूब अंसारी और आमिर खान समेत तमाम लोगों ने व्यवस्था संभाली। वहीं प्रशासन की मुस्तैदी से पूरा कार्यक्रम सकुशल संपन्न हुआ। ईद-उल-फितर सिर्फ एक त्योहार नहीं, बल्कि सब्र, इबादत और मोहब्बत का खूबसूरत पैगाम है, जो कि दिलों को जोड़ता है, रिश्तों को मजबूत करता है और इंसानियत को जिंदा रखता है।