जहां एक तरफ अधिकारी जनता की समस्याओं का समाधान करने में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर उसी तहसील परिसर में रिश्वतखोरी का खुला खेल चल रहा था। तिलहर तहसील में आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ के दौरान ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक पूरनलाल को बरेली की भ्रष्टाचार निवारण संगठन टीम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया।
शाहजहांपुर। जहां एक तरफ अधिकारी जनता की समस्याओं का समाधान करने में जुटे थे, वहीं दूसरी ओर उसी तहसील परिसर में रिश्वतखोरी का खुला खेल चल रहा था। तिलहर तहसील में आयोजित ‘संपूर्ण समाधान दिवस’ के दौरान ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक पूरनलाल को बरेली की भ्रष्टाचार निवारण संगठन टीम ने 10 हजार रुपये की रिश्वत लेते हुए रंगे हाथ पकड़ लिया। हैरानी की बात यह रही कि इस दौरान डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह खुद सभागार में मौजूद थे।
सोमवार को तिलहर तहसील में संपूर्ण समाधान दिवस आयोजित था। डीएम धर्मेंद्र प्रताप सिंह अधिकारियों के साथ लोगों की समस्याएं सुन रहे थे। इसी बीच तहसील गेट के बाहर रिश्वतखोरी का खेल चल रहा था, जिसकी भनक भ्रष्टाचार निवारण संगठन को पहले ही लग चुकी थी।
पुवायां क्षेत्र के सदापुर गांव निवासी राजेश कुमार ने मत्स्य विभाग में समिति पंजीकरण के लिए दिसंबर में ऑनलाइन आवेदन किया था। आरोप है कि ज्येष्ठ मत्स्य निरीक्षक पूरनलाल लगातार फाइल को लटकाकर उनसे एक लाख रुपये की रिश्वत मांग रहा था। परेशान होकर राजेश ने बरेली स्थित भ्रष्टाचार निवारण संगठन से शिकायत की, जिसके बाद जाल बिछाया गया।
योजना के तहत सोमवार को राजेश कुमार 10 हजार रुपये लेकर टीम के साथ तिलहर तहसील पहुंचे। फोन करने पर पूरनलाल खुद तहसील गेट पर आया। जैसे ही उसने पैसे लिए, टीम ने उसे मौके पर ही रंगे हाथ दबोच लिया।
कार्रवाई होते ही तहसील परिसर में अफरा-तफरी मच गई। आरोपी पूरनलाल को तुरंत हिरासत में लेकर कटरा थाने ले जाया गया, जहां आगे की कानूनी कार्रवाई जारी है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि जब डीएम खुद समाधान दिवस में मौजूद थे, तब भी तहसील परिसर में रिश्वत का खेल कैसे चलता रहा। इस घटना ने प्रशासनिक व्यवस्था और निगरानी तंत्र पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।