बरेली

डीएम के आदेश के बाद कब्र खोदकर निकाला गया मासूम का शव, वाटर पार्क सील

अलापुर थाना क्षेत्र के गांव भसराला में निर्माणाधीन वाटर पार्क में आठ वर्षीय मासूम की डूबकर मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। जिस स्विमिंग पूल में लोग मौज-मस्ती और सेल्फी लेने पहुंच रहे थे, वही पूल अब एक मासूम की जान निगल गया।

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May 24, 2026
पार्क सील करती टीम

बदायूं। अलापुर थाना क्षेत्र के गांव भसराला में निर्माणाधीन वाटर पार्क में आठ वर्षीय मासूम की डूबकर मौत ने पूरे इलाके को झकझोर दिया। जिस स्विमिंग पूल में लोग मौज-मस्ती और सेल्फी लेने पहुंच रहे थे, वही पूल अब एक मासूम की जान निगल गया। हादसे के बाद प्रशासन हरकत में आया और रविवार को जिलाधिकारी के आदेश पर दफनाए गए बच्चे के शव को कब्र से निकलवाकर पोस्टमार्टम के लिए भेजा गया। पूरे घटनाक्रम के दौरान गांव में भारी पुलिस बल तैनात रहा। पुलिस ने वाटर पार्क संचालकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर एक आरोपी को हिरासत में ले लिया है, जबकि निर्माणाधीन वाटर पार्क को सील कर दिया गया है।

गांव भसराला निवासी ज़फर का आठ वर्षीय बेटा हसनैन शनिवार दोपहर करीब तीन बजे गांव के पास बने निर्माणाधीन वाटर पार्क में पहुंच गया था। बताया जा रहा है कि खेलते-खेलते वह स्विमिंग पूल के गहरे हिस्से में चला गया और डूब गया। काफी देर तक बच्चा नजर नहीं आया तो परिजनों और ग्रामीणों में हड़कंप मच गया। आनन-फानन में तलाश शुरू हुई तो मासूम का शव पानी में मिला। उसे बाहर निकालकर बचाने की कोशिश की गई, लेकिन तब तक बहुत देर हो चुकी थी। बेटे की मौत के बाद परिवार में चीख-पुकार मच गई और पूरे गांव में मातम फैल गया।

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बिना पोस्टमार्टम के दफना दिया था शव

हादसे के बाद गम में डूबे परिजनों ने बिना किसी कानूनी कार्रवाई और पोस्टमार्टम के बच्चे के शव को सुपुर्द-ए-खाक कर दिया था। मामला प्रशासन तक पहुंचने के बाद अधिकारियों ने इसे गंभीरता से लिया। रविवार को सदर एसडीएम मोहित कुमार सिंह की निगरानी में कब्र से शव निकलवाने की कार्रवाई कराई गई। मौके पर पुलिस, राजस्व विभाग और स्वास्थ्य विभाग की टीम मौजूद रही। पंचनामा भरने के बाद शव को पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया गया। ग्रामीणों के मुताबिक आमदपुर क्षेत्र में बना यह स्विमिंग पूल शुरू से ही सवालों के घेरे में था। करीब 45 दिन पहले ही इसका संचालन शुरू हुआ था। यहां रोजाना बड़ी संख्या में लोग घूमने और फोटो खिंचवाने पहुंच रहे थे, लेकिन सुरक्षा इंतजाम नाम मात्र के भी नहीं थे।

न लाइफ जैकेट, न गोताखोर, न सुरक्षा व्यवस्था

स्थानीय लोगों का आरोप है कि पूल में न लाइफ जैकेट उपलब्ध थीं, न कोई प्रशिक्षित गोताखोर तैनात था और न ही बच्चों की सुरक्षा के लिए कोई निगरानी व्यवस्था थी। भारी भीड़ जुटने के बावजूद संचालकों ने सुरक्षा मानकों को पूरी तरह नजरअंदाज किया। ग्रामीणों का कहना है कि यदि सुरक्षा व्यवस्था होती तो शायद मासूम हसनैन की जान बच सकती थी। हादसे के बाद लोगों में भारी आक्रोश है और प्रशासन से सख्त कार्रवाई की मांग की जा रही है। ग्रामीणों ने यह भी दावा किया कि वाटर पार्क का लाइसेंस तक नहीं था।

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