प्यार और आस्था के संगम की एक चर्चित कहानी सामने आई है। रामपुर की रहने वाली मुस्कान खान ने प्रेम के चलते न सिर्फ अपना जीवनसाथी चुना, बल्कि स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाकर आकाश नाम के युवक के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह कर लिया।
बरेली। प्यार और आस्था के संगम की एक चर्चित कहानी सामने आई है। रामपुर की रहने वाली मुस्कान खान ने प्रेम के चलते न सिर्फ अपना जीवनसाथी चुना, बल्कि स्वेच्छा से सनातन धर्म अपनाकर आकाश नाम के युवक के साथ हिंदू रीति-रिवाजों से विवाह कर लिया। इस फैसले के बाद इलाके में चर्चा का माहौल है।
सुभाषनगर थाना क्षेत्र स्थित अगस्त्य मुनि आश्रम में पंडित के.के. शंखधार की मौजूदगी में पूरे रीति-रिवाज से शादी कराई गई। सबसे पहले शुद्धिकरण की प्रक्रिया पूरी की गई, जिसमें गंगाजल के साथ वैदिक मंत्रों का जाप कराया गया। इसके बाद दोनों ने अग्नि के समक्ष सात फेरे लेकर एक-दूसरे को जीवनसाथी के रूप में स्वीकार किया। विवाह के बाद मुस्कान ने अपना नाम बदलकर ‘मुस्कान यादव’ रख लिया।
बताया गया कि मुस्कान रामपुर के ग्राम थनापुर की रहने वाली हैं, जबकि आकाश पसियापुरा जनूबी गांव के निवासी हैं। दोनों के परिवार इस रिश्ते को लेकर एकमत नहीं थे। जहां आकाश के परिजनों ने सहमति दे दी थी, वहीं मुस्कान के परिवार ने विरोध किया। हालात बिगड़ते देख दोनों घर छोड़कर रामपुर से बरेली पहुंचे और यहां विवाह कर लिया। मुस्कान ने बताया कि करीब एक साल पहले आकाश से उनकी मुलाकात हुई थी। पहली ही नजर में वह उन्हें पसंद आ गए। बातचीत बढ़ी और रिश्ता गहराता चला गया। मुस्कान ने ही पहले आकाश को अपने दिल की बात कही और शादी का प्रस्ताव रखा, जिसे आकाश ने स्वीकार कर लिया।
मुस्कान का कहना है कि वह पिछले कई वर्षों से भगवान श्री कृष्ण की भक्ति से जुड़ी हुई हैं और सनातन परंपराओं से प्रभावित हैं। उन्होंने बताया कि यह फैसला उन्होंने अपनी इच्छा से लिया है और किसी प्रकार का दबाव नहीं था। उनका मानना है कि उन्हें इस धर्म में अधिक सम्मान और स्वतंत्रता का अनुभव होता है। मुस्कान के इस कदम और बयान के बाद सामाजिक व धार्मिक हलकों में चर्चाएं तेज हो गई हैं। जहां कुछ लोग इसे प्रेम और आस्था की स्वतंत्रता बता रहे हैं, वहीं कुछ इसे लेकर अलग-अलग प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। फिलहाल यह मामला इलाके में चर्चा का विषय बना हुआ है।