
IPS अंशिका वर्मा के बारे में। फोटो सोर्स-इंस्टाग्राम ips anshika verma
IPS Anshika Verma Latest News: बरेलीपुलिस ने डेढ़ साल के मासूम ऋषभ को सकुशल बरामद करने के बाद एक ऐसे अंतरराज्यीय बच्चा चोर गिरोह का खुलासा किया है, जो बच्चों का अपहरण कर उन्हें देश के अलग-अलग शहरों में निसंतान दंपतियों को बेचने का काम करता था। जांच में सामने आया है कि गिरोह चोरी या अपहरण किए गए बच्चों की कीमत 5 से 10 लाख रुपये तक वसूलता था।
पुलिस जांच के अनुसार, गिरोह का सरगना पश्चिम बंगाल के नादिया जिले का रहने वाला डॉ. संजय कुमार है। वह अपने सहयोगी डॉ. केशव राम उर्फ मंजेश और नर्स सीता के साथ मिलकर बच्चों की अवैध खरीद-फरोख्त का नेटवर्क चला रहा था। आरोप है कि इस काम के लिए एक कथित एबॉर्शन और एडॉप्शन सेंटर का इस्तेमाल किया जाता था।
24 मई को बरेली के प्रसिद्ध धार्मिक स्थल मनोना धाम से डेढ़ साल के ऋषभ का अपहरण कर लिया गया था। मामले की जांच के दौरान महिला एसओजी टीम ने आईपीएस अधिकारी अंशिका वर्मा के नेतृत्व में कार्रवाई करते हुए मुठभेड़ के बाद योगेश कनौजिया और पवन चंदेल को गिरफ्तार किया और बच्चे को सुरक्षित बरामद कर लिया।
पूछताछ में गिरफ्तार आरोपियों ने बताया कि वे अपने साथी उत्तम कुमार के साथ मिलकर डॉ. संजय कुमार के नेटवर्क के लिए काम करते थे। उनका काम अस्पतालों, धार्मिक आयोजनों, मेलों और भीड़भाड़ वाले इलाकों से बच्चों का अपहरण कर उन्हें गिरोह तक पहुंचाना था। इसके बदले उन्हें मोटी रकम दी जाती थी।
जांच में यह भी सामने आया कि चोरी किए गए बच्चों को दिल्ली, मुंबई समेत देश के कई बड़े शहरों में निसंतान और संपन्न दंपतियों को बेचा जाता था। बच्चों की उम्र और मांग के आधार पर सौदे तय किए जाते थे और इसके एवज में लाखों रुपये वसूले जाते थे।
अपनी जान की परवाह किए बिना गिरोह तक पहुंचने के लिए एसपी साउथ अंशिका वर्मा ने खुद एक ग्राहक की भूमिका निभाई। उन्होंने डॉ. संजय कुमार से संपर्क कर बच्चा गोद लेने की इच्छा जताई। बातचीत के दौरान डॉक्टर ने उन्हें 5 लाख रुपये में नवजात बच्चा उपलब्ध कराने की बात कही और आधी रकम टोकन मनी के रूप में जमा कराने का प्रस्ताव दिया।
योजना के तहत अंशिका वर्मा आरोपी डॉक्टर के सेंटर पहुंचीं। वहां डॉ. संजय कुमार, डॉ. केशव राम और नर्स सीता मौजूद थे। जैसे ही डॉक्टर ने टोकन मनी के रूप में दी गई नोटों की गड्डी हाथ में ली, अंशिका वर्मा ने अपनी असली पहचान उजागर कर दी। इसके तुरंत बाद बाहर तैनात महिला एसओजी टीम ने कार्रवाई करते हुए तीनों आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया।
पुलिस को आशंका है कि यह गिरोह लंबे समय से सक्रिय था और अब तक कई बच्चों की खरीद-फरोख्त कर चुका है। गिरफ्तार आरोपियों से पूछताछ के आधार पर अन्य मामलों की भी जांच की जा रही है और नेटवर्क से जुड़े अन्य लोगों की तलाश जारी है।
फिलहाल पुलिस सभी आरोपियों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई पूरी कर रही है। आवश्यक दस्तावेजी प्रक्रिया पूरी होने के बाद उन्हें जेल भेजने की तैयारी की जा रही है। साथ ही गिरोह के अन्य सदस्यों और संभावित सहयोगियों की तलाश भी तेज कर दी गई है।
अंशिका वर्मा उत्तर प्रदेश कैडर की 2021 बैच की आईपीएस अधिकारी हैं। उनका जन्म 3 जनवरी 1996 को प्रयागराज में हुआ था। वर्तमान में वह बरेली में एसपी (साउथ) के पद पर तैनात हैं और अपनी कार्यशैली को लेकर लगातार चर्चा में रहती हैं।
अंशिका वर्मा ने गलगोटियास कॉलेज से इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशन इंजीनियरिंग में बीटेक की डिग्री हासिल की। इसके बाद उन्होंने सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी की और यूपीएससी 2020 में ऑल इंडिया 136वीं रैंक हासिल कर आईपीएस अधिकारी बनीं।
अपने करियर के दौरान अंशिका वर्मा आगरा और गोरखपुर समेत कई जिलों में सेवाएं दे चुकी हैं। बाद में उन्हें बरेली में एसपी साउथ की जिम्मेदारी सौंपी गई। कानून-व्यवस्था को लेकर उनकी सख्त कार्यशैली और अपराधियों के खिलाफ तेज कार्रवाई की वजह से उनकी पहचान एक प्रभावी पुलिस अधिकारी के रूप में बनी है।
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Updated on:
1 Jun 2026, 12:44 PM IST
Published on:
1 Jun 2026, 12:44 PM IST
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