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रंग बिरंगी बच्चों की आइसक्रीम में मिल रहे यूरिया-डिटर्जेंट, जांच में खुली मिलावट की बड़ी पोल

bareilly news: गर्मी से राहत देने वाली रंग-बिरंगी आइसक्रीम अब सेहत के लिए बड़ा खतरा भी साबित हो सकती है। फूड सेफ्टी विभाग की जांच रिपोर्टों ने खुलासा किया है कि बाजार में बिक रही कई आइसक्रीम और डेयरी उत्पादों में यूरिया, डिटर्जेंट, सिंथेटिक केमिकल, घटिया फैट और कृत्रिम रंगों जैसी खतरनाक मिलावट पाई गई है।

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Urea Detergent Found In Icecream

आइसक्रीम खाते बच्चे

गर्मी से राहत देने वाली रंग-बिरंगी आइसक्रीम अब सेहत के लिए बड़ा खतरा भी साबित हो सकती है। फूड सेफ्टी विभाग की जांच रिपोर्टों ने खुलासा किया है कि बाजार में बिक रही कई आइसक्रीम और डेयरी उत्पादों में यूरिया, डिटर्जेंट, सिंथेटिक केमिकल, घटिया फैट और कृत्रिम रंगों जैसी खतरनाक मिलावट पाई गई है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसी आइसक्रीम बच्चों के शरीर में "स्लो पॉइजन" की तरह असर कर रही हैं और पेट, किडनी व लिवर से जुड़ी गंभीर बीमारियों का कारण बन सकती हैं।

गर्मी बढ़ी, मिलावटखोर हुए सक्रिय

तापमान बढ़ने के साथ ही आइसक्रीम और सॉफ्टी की मांग भी तेजी से बढ़ रही है। इसी का फायदा उठाकर मिलावटखोर दूध और क्रीम की जगह सिंथेटिक फैट, सस्ते केमिकल, आर्टिफिशियल फ्लेवर और इंडस्ट्रियल कलर का इस्तेमाल कर कम लागत में बड़े पैमाने पर आइसक्रीम तैयार कर रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार कुछ नमूनों में दूध की गुणवत्ता बढ़ाने के लिए यूरिया और टेक्सचर सुधारने के लिए डिटर्जेंट जैसे तत्वों के इस्तेमाल की पुष्टि हुई है।

जांच रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता

फूड सेफ्टी विभाग के आंकड़ों के मुताबिक बीते चार महीनों में जांच के लिए भेजे गए 529 खाद्य नमूनों में 200 से अधिक नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। इनमें खोया, पनीर और अन्य डेयरी उत्पाद शामिल थे, जिनका उपयोग आइसक्रीम निर्माण में किया जा रहा था। सबसे चिंताजनक तथ्य यह रहा कि आइसक्रीम उत्पादों के 50 प्रतिशत से अधिक नमूने गुणवत्ता परीक्षण में फेल पाए गए।

बच्चों की सेहत पर सबसे बड़ा खतरा

बाल रोग विशेषज्ञों का कहना है कि बच्चों की रोग प्रतिरोधक क्षमता अपेक्षाकृत कमजोर होती है। ऐसे में मिलावटी आइसक्रीम का असर सबसे पहले उनके पाचन तंत्र, किडनी और लिवर पर पड़ता है। लगातार सेवन से फूड पॉइजनिंग, उल्टी-दस्त, पेट का संक्रमण, एलर्जी, स्किन रिएक्शन, मोटापा, फैटी लिवर, हार्मोनल असंतुलन और कमजोर इम्युनिटी जैसी समस्याएं बढ़ सकती हैं। डॉ. वंदना नेगी, पीडियाट्रिशियन के अनुसार गर्मियों में फूड पॉइजनिंग और पेट संबंधी बीमारियों के कई मामलों के पीछे सस्ती और मिलावटी आइसक्रीम बड़ी वजह बन रही है। वहीं वरिष्ठ फिजिशियन डॉ. महेश कुमार मेहरोत्रा का कहना है कि सिंथेटिक फ्लेवर और कृत्रिम रंग बच्चों के हार्मोनल सिस्टम और लिवर को प्रभावित कर सकते हैं।

ऐसे पहचानें मिलावटी आइसक्रीम

जरूरत से ज्यादा चमकीला रंग और तेज कृत्रिम खुशबू
मुंह में साबुन जैसा स्वाद महसूस होना
बहुत जल्दी पिघल जाना या बिल्कुल न पिघलना
बर्फ के बड़े-बड़े क्रिस्टल दिखाई देना
पैकेट पर लाइसेंस नंबर और निर्माता की जानकारी न होना
सामान्य बाजार दर से बेहद सस्ती कीमत पर बिकना
सड़क किनारे बिकने वाली आइसक्रीम सबसे ज्यादा जोखिम भरी
विशेषज्ञों के मुताबिक खुले में बिकने वाली बिना ब्रांड और बिना लाइसेंस वाली आइसक्रीम में साफ-सफाई और कोल्ड चेन मानकों का पालन नहीं होता। इससे बैक्टीरिया और संक्रमण का खतरा कई गुना बढ़ जाता है। गर्मियों में बच्चों में बढ़ रहे पेट दर्द, डायरिया और फूड इन्फेक्शन के मामलों के पीछे यह एक बड़ी वजह बन रही है।

लगातार चल रहा अभियान

फूड सेफ्टी विभाग के जिला अधिकारी राहुल सिंह ने बताया कि मिलावटी डेयरी उत्पाद शरीर में धीमे जहर की तरह काम करते हैं। विभाग लगातार सैंपलिंग और कार्रवाई कर रहा है तथा लोगों को सुरक्षित और प्रमाणित खाद्य उत्पादों के उपयोग के लिए जागरूक भी किया जा रहा है।

क्या करें उपभोक्ता

गर्मी में आइसक्रीम खरीदते समय केवल लाइसेंस प्राप्त ब्रांड और प्रतिष्ठानों से ही उत्पाद लें। पैकेट पर एफएसएसएआई लाइसेंस नंबर, निर्माण तिथि और एक्सपायरी डेट जरूर जांचें। बच्चों को सड़क किनारे खुले में बिकने वाली सस्ती आइसक्रीम से दूर रखें, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही उनकी सेहत पर भारी पड़ सकती है।

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