एक तरफ स्वास्थ्य विभाग फर्जी अस्पतालों और अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई का दावा करता है, वहीं शहर में खुलेआम चल रहे ये अवैध सेंटर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। विभागीय अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं और लोग परेशानियों का सामना कर रहे हैं। बिथरी चैनपुर क्षेत्र में सामने आया ताजा मामला सिस्टम की लापरवाही को उजागर करता है।
बरेली। एक तरफ स्वास्थ्य विभाग फर्जी अस्पतालों और अवैध क्लीनिकों पर कार्रवाई का दावा करता है, वहीं शहर में खुलेआम चल रहे ये अवैध सेंटर लोगों की जिंदगी से खिलवाड़ कर रहे हैं। विभागीय अफसर चुप्पी साधे बैठे हैं और लोग परेशानियों का सामना कर रहे हैं। बिथरी चैनपुर क्षेत्र में सामने आया ताजा मामला सिस्टम की लापरवाही को उजागर करता है।
रामगंगानगर कॉलोनी निवासी विश्वनाथ श्रीवास्तव ने डीएम अविनाश सिंह को प्रार्थनापत्र देकर बड़ा खुलासा करते हुए बताया कि उनकी आठ माह की गर्भवती पत्नी नीशि श्रीवास्तव का इलाज ब्लॉक बी-39 स्थित रूही क्लिनिक पर डॉ. संजय गोस्वामी कर रहे थे। आरोप है कि डॉक्टर लगातार इलाज के नाम पर उनसे करीब 40 हजार रुपये वसूल चुके हैं।
पीड़ित के मुताबिक डॉक्टर गोस्वामी बार-बार उन्हें यह कहकर बहलाते थे कि वे गरीब हैं, इसलिए कम खर्च में डिलीवरी तुला शेरपुर में रहने वाली एक महिला कमलेश से करवा देंगे। डॉक्टर के भरोसे में आकर वह अपनी पत्नी को कमलेश के घर बने अवैध क्लीनिक पर ले गए, जहां कमलेश और उसका पति महेश डिलीवरी कराने का काम करते हैं। डिलीवरी के दौरान गंभीर लापरवाही होने से प्रसूता को अत्यधिक रक्तस्राव हुआ और उसकी हालत नाजुक हो गई। परिजन उसे तत्काल सुमित वर्षा हॉस्पिटल, पीलीभीत बाईपास रोड ले गए, जहां डॉक्टर वर्षा गंगवार ने बड़ी मशक्कत के बाद उसकी जान बचाई। महिला अभी भी आईसीयू में भर्ती है।
उधर, नवजात बच्ची को जन्म के बाद उचित इलाज न मिलने से करीब 12 घंटे बाद उसकी मौत हो गई। जब विश्वनाथ ने डॉक्टर संजय गोस्वामी से सवाल किया तो कमलेश ने चौंकाने वाला खुलासा किया कि डॉक्टर उनसे 25 हजार रुपये लेकर जा चुके हैं। विश्वनाथ का आरोप है कि डॉक्टर संजय गोस्वामी, कमलेश और उसका पति महेश मिलकर गरीब मरीजों को निशाना बनाते हैं और अवैध क्लीनिक के जरिए मोटी कमाई कर रहे हैं। इलाज में लापरवाही होने के बावजूद कोई कार्रवाई नहीं हो रही।
पीड़ित ने इस पूरे प्रकरण की शिकायत डीएम अविनाश सिंह से की है। डीएम ने कहा कि जिले में अभियान चलाकर अवैध अस्पतालों और क्लीनिकों पर सख्त कार्रवाई की जाएगी, ताकि किसी और की जान के साथ खिलवाड़ न हो सके। वहीं इस मामले में जब सीएमओ विश्राम सिंह से बात की गई तो वह जवाब देने से बचते नज़र आए। किसी भी कार्रवाई या जांच के सवाल पर उन्होंने बात टाल दी। ऐसे में साफ जाहिर होता है कि शहर में चल रहे अवैध क्लीनिक और अस्पताल विभागीय अफसरों के संरक्षण में फल–फूल रहे हैं।