बरेली

फर्जी दस्तावेजों पर निकालीं लग्जरी कारें, पिता-पुत्र गिरफ्तार, बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया करोड़ों का खेल

शहर में फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंकों को करोड़ों का चूना लगाकर लग्जरी कारें निकालने वाले बड़े गिरोह का बारादरी थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चार महंगी कारें, फर्जी आय प्रमाणपत्र और निवास प्रमाणपत्र बरामद किए हैं।

2 min read
May 24, 2026
पुलिस की गिरफ्त में आरोपी

बरेली।शहर में फर्जी दस्तावेजों के सहारे बैंकों को करोड़ों का चूना लगाकर लग्जरी कारें निकालने वाले बड़े गिरोह का बारादरी थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। पुलिस ने पिता-पुत्र को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चार महंगी कारें, फर्जी आय प्रमाणपत्र और निवास प्रमाणपत्र बरामद किए हैं। जांच में बैंक कर्मचारियों की संदिग्ध भूमिका भी सामने आई है, जिसके बाद बैंकिंग सिस्टम में मची मिलीभगत ने पुलिस को भी चौंका दिया है।

बारादरी थाना प्रभारी विजेंद्र सिंह ने बताया कि पुलिस को देर रात सूचना मिली थी कि 99 बीघा मैदान क्षेत्र में फर्जी लोन पर निकाली गई गाड़ियों की डील होने वाली है। सूचना मिलते ही पुलिस टीम ने घेराबंदी कर मौके पर दबिश दी। वहां से मोहम्मद शमी उर्फ शेरा और उसके बेटे मोहम्मद सैराब को गिरफ्तार कर लिया गया। मौके से चार लग्जरी कारें बरामद हुईं, जिनके दस्तावेजों की जांच में बड़ा फर्जीवाड़ा सामने आया। पुलिस ने दोनों आरोपियों को हिरासत में लेकर पूछताछ शुरू की तो पूरे रैकेट की परतें खुलती चली गईं।

ये भी पढ़ें

मेड़ के विवाद में चली ताबड़तोड़ गोलियां, एक ही परिवार के चार भाई घायल, गांव में मचा हड़कंप

फर्जी आय प्रमाणपत्र बनाकर पास कराते थे कार लोन

पूछताछ में आरोपी सैराब ने खुलासा किया कि वह अपने पिता और बैंक कर्मचारी रविंद्र कुमार निश्छल के साथ मिलकर यह खेल चला रहा था। गिरोह पहले फर्जी आय प्रमाणपत्र और निवास प्रमाणपत्र तैयार करता था, फिर इन्हीं दस्तावेजों के जरिए बैंकों से आसानी से कार लोन पास करा लिया जाता था। लोन पास होने के बाद गाड़ियां निकालकर उन्हें दूसरे राज्यों में ऊंचे दामों पर बेच दिया जाता था। पुलिस के मुताबिक अब तक सात गाड़ियां इस तरीके से निकाली जा चुकी हैं, जिनमें से कई कारें बाहर के राज्यों में बेची जा चुकी हैं।

बैंक कर्मचारियों की भूमिका ने बढ़ाई जांच

मामले में बैंक कर्मचारी रविंद्र कुमार निश्छल का नाम सामने आने के बाद जांच का दायरा बढ़ा दिया गया है। पुलिस इस बात की जांच कर रही है कि आखिर बिना सत्यापन के इतने बड़े लोन कैसे पास हो गए। शुरुआती जांच में बैंक कर्मचारियों की मिलीभगत से करोड़ों रुपये के फर्जीवाड़े की आशंका जताई जा रही है। पुलिस अब गिरोह से जुड़े अन्य लोगों और बेची गई गाड़ियों का रिकॉर्ड खंगाल रही है। अधिकारियों का कहना है कि बैंकिंग नेटवर्क में शामिल अन्य कर्मचारियों की भूमिका भी जांच के घेरे में है और जल्द ही बड़े खुलासे हो सकते हैं।

Also Read
View All