पांच साल मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे बड़ा बाईपास के किसानों को फिलहाल राहत नहीं मिल पाई है।
बरेली। पांच साल मुआवजे के लिए संघर्ष कर रहे बड़ा बाईपास के किसानों को फिलहाल राहत नहीं मिल पाई है। बड़ा बाईपास के आस पास के 33 गांवों के 600 किसानों को भूमि अधिग्रहण के तहत मिलने वाले मुआवजे के लिए लम्बा इंतजार करना पड़ेगा। जिलाधिकारी के पत्र पर शासन ने अपनी गाइडलाइन दी है।
ये है नियम
भूमि अधिग्रहण कानून की नियमावली के तहत अगर किसी जमीन का एक बार अवार्ड घोषित होने के बाद उस जमीन का दोबारा अवार्ड घोषित नहीं हो सकता है। अगर मुआवजा देने में कोई लिपिक त्रुटि हुई है, तो उसे छह माह के अंदर सुधारा जा सकता है, क्योंकि ये बड़ा बाईपास जमीन अधिग्रहण का मामला काफी पुराना है इसलिए ये इस नियम में नहीं आता है।
क्या था मामला
बड़ा बाईपास निर्माण के लिए प्रशासन ने 259 हेक्टेयर भूमि का अधिग्रहण किया था। इसमें लगभग 2390 किसान शामिल थे, लेकिन 600 किसानों ने मुआवजे की रकम कम बताकर मुआवजा लेने से मना कर दिया था और ये किसान ज्यादा मुआवजे की मांग को लेकर कोर्ट चले गए थे, लेकिन लम्बा समय बीतने के बाद भी मामले का निस्तारण नहीं हुआ तो किसानों ने कोर्ट के बाहर मामले का निस्तारण करने के लिए 20 दिन पहले प्रशासन को ज्ञापन देकर हाइवे पर जाम करने व ट्रक के नीचे लेटने की चेतावनी दी थी। जिसके बाद प्रशासन ने किसानों से वक्त मांगा था और शासन को दोबारा अवार्ड करने के लिए पत्र लिखा था और मामले की पैरवी के लिए विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी सुल्तान अहमद सिद्दकी को लखनऊ भेजा था।
कोर्ट से होगा मामला तय
विशेष भूमि अध्यापित अधिकारी की पैरवी पर निदेशक भूमि अधिग्रहण ने अपनी रिपोर्ट दी है जिसे कोर्ट में भेजा गया है। अब कोर्ट ने तीन बिंदुओं पर प्रशासन से आख्या मांगी है। प्रशासन अब कोर्ट को अपना जवाब भेज रहा है। इतनी प्रक्रिया के बाद अब कोर्ट से तय होगा कि किसानों को किस रेट से कब और कितना मुआवजा मिलेगा। इस प्रक्रिया में अभी वक्त लग सकता है।
दी थी आत्महत्या की चेतावनी
बड़ा बाईपास के किसानों का आरोप था कि अलग अलग गांवों में अलग अलग मुआवजा तय किया गया है, जिसके कारण करीब 600 किसानों ने मुआवजा लेने से इंकार कर दिया था और पिछले पांच साल से वो मुआवजे की लड़ाई लड़ रहें है। कोई राहत न मिलते देख किसानों ने जाम और ट्रक के नीचे कुचल कर जान देने की धमकी दी थी जिसके बाद प्रशासन ने किसानों से बात कर कुछ दिन का समय मांगा था, लेकिन अभी भी फिलहाल किसानों को जल्द राहत मिलती नहीं दिख रही है।