बरेली

जो काम मोदी के मंत्री नहीं कर पाए वो इस महिला प्रधान ने कर दिखाया

महिला ग्राम प्रधान ने अपने गांव में ऐसा विकास कराया है कि वो शहरी बस्ती जैसा नजर आता है।
2 min read
• •
Updated: 20 Jun 2018, 2:45 PM IST
gram pradhan
gram pradhan

बरेली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सांसद आदर्श गांव योजना के तहत सांसदों को गांव गोद लेकर उन गांवों में विकास कार्य कराने को कहा था लेकिन अभी भी सांसदों द्वारा गोद लिए हुए गांव विकास की राह तक रहे हैं। लेकिन बरेली की एक महिला ग्राम प्रधान ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बात पर अमल करते हुए अपने गांव की तस्वीर बदल दी है। महिला ग्राम प्रधान ने पीएम मोदी को आदर्श मानते हुए अपने गांव में कई विकास कार्य कराए हैं जिसके कारण ये गांव किसी शहरी बस्ती से कम नहीं लगता है।

गांव की बदली तस्वीर
फरीदपुर तहसील का उम्मेदपुर भुता गांव किसी जमाने में बदहाल था, लेकिन यहां की ग्राम प्रधान बबली देवी ने इस गांव की तस्वीर ही बदल दी है। बबली देवी ने अपने गांव के लिए वो कर दिखाया जो बड़े बड़े जनप्रतिनिधि नहीं कर पाए। गांव का सरकारी स्कूल मॉडल बन रहा है। इस स्कूल का शौचालय किसी होटल के शौचालय से कम नहीं है। इसके साथ ही बबली ने प्रधानमंत्री के स्वच्छ भारत मिशन से प्रभावित होकर गांव को साफ़ सुथरा बनाया है। गांव की सड़कों के किनारे कूड़े के ढेर नहीं नजर आते हैं। ग्राम प्रधान ने अपने गांव के लोगों की खरीददारी के लिए ऐसा बाजार बनाया है जिसमें गंदगी का नामोनिशान नहीं है। इसके साथ ही गांव में वाई फाई की भी सुविधा उपलब्ध कराई गई है।

ऐसे बनाया गांव को आदर्श
गांव को चमकाने के लिए इस महिला ग्राम प्रधान ने कोई सरकारी मदद नहीं ली बल्कि गांव में लगने वाले बाजार को ही इन्होने कमाई का जरिया बनाया। बाजार में 200 से भी ज्यादा दुकानें हैं जिनसे किराया वसूला जाता है। इसके चलते पंचायत का खजाना भरता चला गया और एक साल में 22 लाख रूपये की आमदनी हुई जिससे गांव की अब तक 80 प्रतिशत गलियां पक्की कराई जा चुकी है। खराब पड़े हैंडपंप को रिबोर कराकर पेयजल की सुविधा दिलाई गई। आधुनिक सरकारी प्राइमरी स्कूल व बाल मित्र शौचालय तैयार कराया। फिलहाल बारातघर निर्माणाधीन है। इसी माह घरों पर स्वच्छता कर लगाकर साफ-सफाई की व्यवस्था सुदृढ़ कराने, पूरे गांव को वाईफाई कराने, डिजिटल लाइब्रेरी आदि का निर्माण कराने व अन्य सुविधाओं को दिलाने में महिला प्रधान जुटी हैं।

Published on: