
बरेली। अगर ज़िन्दगी में कुछ करने का जज़्बा हो तो कोई कठिनाई आड़े नही आती। इसे साबित करके दिखाया है बरेली कालेज की डॉक्टर वंदना शर्मा ने। एक मध्यमवर्गीय परिवार में पली-बढ़ी वंदना शर्मा ने एक महिला होने के बावजूद सभी चुनौतियों का डटकर मुकाबला किया। उन्होंने न केवल शिक्षा के क्षेत्र में नए आयाम अर्जित किए, बल्कि सामाजिक सरोकारों में भी अपना अहम योगदान दिया। बरेली कॉलेज के 180 साल के इतिहास में उन्हें पहली महिला चीफ प्रॉक्टर होने का गौरव प्राप्त है। इसके अलावा एनसीसी, पत्रकारिता एवं राजनीति शास्त्र की वह अनोखी ज्ञाता है।
मेरठ और मुरादाबाद में हुई पढ़ाई
मूल रूप से बुलन्दशहर की रहने वाली वंदना शर्मा का जन्म 2 मार्च 1974 को हुआ था। वंदना के पिता पुलिस में थे जिसके कारण वंदना शर्मा के पिता का जहां तबादला होता वही उनकी शिक्षा दीक्षा हुई।वंदना शर्मा ने अपनी पढ़ाई मेरठ और मुरादाबाद में पूरी की।वंदना शर्मा ने 2 मार्च 2000 को बरेली कॉलेज ज्वाइन किया था जिसके बाद वो सफलता की सीढ़ियां चढ़ती हुई आज चीफ प्रॉक्टर के पद तक पहुँची है इसके साथ ही वंदना शर्मा कॉलेज के पत्रकारिता विभाग की हेड और एनसीसी अफसर है।
सीआरपीएफ में भी कर चुकी है नौकरी
वंदना शर्मा की पहली नौकरी दिल्ली पुलिस ने लगी थी वो सन 1995 में दिल्ली पुलिस में बतौर सब इंस्पेक्टर भर्ती हुई थी।इस नौकरी के दौरान ही उनका चयन सीआरपीएफ में हो गया और उन्होंने 1998 में सीआरपीएफ में असिस्टेंट कमांडेंट के पद पर ज्वॉइन किया और उनकी मेघालय में तैनाती हुई।लेकिन उनकी माँ की तबियत खराब होने की वजह से उन्हें नौकरी छोड़नी पड़ी।और कमीशन के द्वारा उन्हें बरेली कॉलेज में ज्वाइनिंग मिली।
ये हैं उपलब्धियां
वंदना शर्मा को रुहेलखण्ड यूनिवर्सिटी की तरफ से एलएलएम में गोल्ड मैडल मिला इसके साथ ही वो उत्तर प्रदेश की बेस्ट एनसीसी कैडेट और बेस्ट ऑफिसर बनने का भी गौरव प्राप्त हुआ है।इसके साथ ही उन्हें अखिलेश सरकार में मलाला पुरुष्कार से भी सम्मानित किया जा चुका है।
चीफ प्रॉक्टर का पद चुनौती भरा
बरेली कॉलेज के इतिहास में वंदना शर्मा पहली महिला चीफ प्रॉक्टर बनी है।वंदना शर्मा ने बताया कि चीफ प्रॉक्टर का पद चुनौती भरा लेकिन इन चुनौतियों का सामना किया जाएगा।इसके साथ ही उन्होंने बताया कि उनके चार माह के कार्यकाल में कॉलेज में एक भी बवाल नही हुआ है।