आईवीआरआई की विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने दिल्ली चिड़ियाघर की डेढ़ वर्षीय श्वेत बाघिन के दोनों पिछले पैरों में हुए गंभीर फ्रैक्चर की जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया।
बरेली। आईवीआरआई की विशेषज्ञ सर्जिकल टीम ने दिल्ली चिड़ियाघर की डेढ़ वर्षीय श्वेत बाघिन के दोनों पिछले पैरों में हुए गंभीर फ्रैक्चर की जटिल सर्जरी कर उसे नया जीवन दिया। करीब छह घंटे तक चली मैराथन सर्जरी में डॉक्टरों ने एडवांस आर्थोपेडिक्स तकनीक का इस्तेमाल करते हुए टूटी हड्डियों को प्लेट और रॉड की मदद से सफलतापूर्वक जोड़ दिया। यह तकनीक देश में पहली बार किसी बाघिन पर इस्तेमाल की गई है।
आईवीआरआई के सर्जरी विभाग के विज्ञानी डॉ. रोहित कुमार के नेतृत्व में विशेषज्ञ टीम ने यह जटिल ऑपरेशन किया। बाघिन के दोनों पिछले पैरों में टिबियल फ्रैक्चर था, जिसे ठीक करने के लिए आधुनिक ऑर्थोपेडिक तकनीक का सहारा लिया गया। सर्जरी के दौरान डॉक्टरों को बेहद सावधानी बरतनी पड़ी, क्योंकि बाघ की हड्डियां काफी मजबूत होती हैं और उनके उपचार की प्रक्रिया भी जटिल होती है। वहीं डॉ. रोहित कुमार ने बताया कि आमतौर पर पशुओं में टूटी हड्डी को जोड़ने के लिए सिंगल प्लेट लगाई जाती है, लेकिन इस मामले में बाघिन की दाहिनी टिबिया को डबल प्लेटिंग तकनीक से जोड़ा गया। मजबूत हड्डियों के कारण दो प्लेटों का सहारा लिया गया, जिससे हड्डी को अतिरिक्त मजबूती मिल सके और जल्दी जुड़ने में मदद मिले।
बाघिन के बाएं पैर की टिबिया को रॉड-प्लेट कंस्ट्रक्ट तकनीक से ठीक किया गया। इस प्रक्रिया में प्लेट के साथ पैर के भीतर रॉड डाली जाती है, जिससे टूटी हुई हड्डी को अतिरिक्त सहारा मिलता है और रिकवरी बेहतर होती है। दिल्ली चिड़ियाघर में दो मार्च को बाघिन के दोनों पिछले पैरों में फ्रैक्चर हो गया था। तीन मार्च को चिड़ियाघर के पशु चिकित्सकों ने फाइबरग्लास बैंडेजिंग के जरिए प्रारंभिक उपचार किया। चोट की गंभीरता को देखते हुए चार और पांच मार्च को आईवीआरआई के निदेशक को उन्नत सर्जरी के लिए सूचित किया गया।
सात मार्च को आईवीआरआई की टीम दिल्ली पहुंची और करीब छह घंटे तक चली जटिल सर्जरी के बाद बाघिन की टूटी हड्डियों की मरम्मत कर दी। इस सर्जरी में डॉ. अखिलेश कुमार, डॉ. अमन, डॉ. साईं और डॉ. प्रेम भी शामिल रहे। सर्जरी के बाद बाघिन को पोस्ट-ऑपरेटिव निगरानी में रखा गया है। डॉक्टरों के अनुसार उसकी स्थिति स्थिर है और रिकवरी की प्रक्रिया पर लगातार नजर रखी जा रही है। विशेषज्ञों का कहना है कि आधुनिक तकनीक के इस्तेमाल से बाघिन के जल्द स्वस्थ होने की उम्मीद है।