बरेली

24 हफ्तों की तपस्या पूरी, 1280 रिक्रूट्स बने भारतीय सेना के जांबाज सैनिक, जाट रेजिमेंट सेंटर में ली शपथ

बरेली स्थित जाट रेजिमेंट सेंटर के बख्शी परेड ग्राउंड में रविवार को गर्व, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां 24 सप्ताह के कठोर सैन्य प्रशिक्षण को पूरा करने के बाद 1280 रिक्रूट्स भारतीय सेना का हिस्सा बन गए।
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May 31, 2026
Newly trained soldiers take oath
शपथ लेते नवप्रशिक्षित सैनिक (फोटो- पत्रिका)

बरेली: जाट रेजिमेंट सेंटर के बख्शी परेड ग्राउंड में रविवार को गर्व, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। 24 सप्ताह के कठोर सैन्य प्रशिक्षण को सफलतापूर्वक पूरा करने के बाद 1280 रिक्रूट्स भारतीय सेना का हिस्सा बन गए। पासिंग आउट परेड में कदमताल की गूंज ने पूरे परेड मैदान को देशभक्ति के रंग में रंग दिया।

पासिंग आउट परेड समारोह में जाट रेजिमेंट सेंटर के कमांडेंट ब्रिगेडियर हरजीत प्रीतपील सिंह मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उन्होंने भव्य परेड की सलामी ली और प्रशिक्षण के दौरान उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट्स को पदक देकर सम्मानित किया। समारोह में बड़ी संख्या में रिक्रूट्स के अभिभावक और परिजन भी मौजूद रहे। अपने बेटों को सेना की वर्दी में देखकर उनके चेहरे गर्व से खिल उठे।

अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को बताया सफलता का मंत्र

ब्रिगेडियर हरजीत प्रीतपील सिंह ने कहा कि रिक्रूट्स के कदमों की खनक उनके कठिन प्रशिक्षण, अनुशासन और समर्पण की गवाही दे रही है। उन्होंने कहा कि यह दिन केवल रिक्रूट्स ही नहीं, बल्कि उनके परिवारों के लिए भी गौरव का क्षण है। नए सैनिकों से उन्होंने संगठन, अनुशासन और कर्तव्यनिष्ठा को जीवन का मूल मंत्र बनाने का आह्वान किया।

ब्रिगेडियर ने कहा पलटन ही सैनिक का परिवार होती है और पलटन के प्रति वफादारी ही देश के प्रति वफादारी है। प्रशिक्षण के विभिन्न क्षेत्रों में श्रेष्ठ प्रदर्शन करने वाले रिक्रूट्स को विशेष पदकों से सम्मानित किया गया। कुलवीर को सर्वश्रेष्ठ अकादमिक पदक, चित्रांश तोमर को सर्वश्रेष्ठ युद्ध कौशल एवं शारीरिक दक्षता पदक, सुशांत मलिक को सर्वश्रेष्ठ ड्रिल पदक तथा विपुल मलिक को सर्वश्रेष्ठ फायर पदक प्रदान किया गया। विवेक को समग्र रूप से सर्वश्रेष्ठ रिक्रूट घोषित किया गया। वहीं मुल्तान कंपनी को विजेता कंपनी का खिताब मिला।

जाट रेजिमेंट की गौरवगाथा का कराया स्मरण

कमांडेंट ने नवसैनिकों को जाट रेजिमेंट की गौरवशाली परंपरा और वीरता की विरासत से परिचित कराया। उन्होंने कहा कि 230 वर्ष से अधिक पुरानी इस रेजिमेंट ने देश की हर महत्वपूर्ण लड़ाई में अदम्य साहस का परिचय दिया है। अब इस गौरवशाली परंपरा को आगे बढ़ाने की जिम्मेदारी नए सैनिकों के कंधों पर है। समारोह के अंत में सभी नवप्रशिक्षित सैनिकों को उनके धर्म के अनुसार शपथ दिलाई गई। हिंदू, मुस्लिम, सिख और ईसाई धर्मगुरुओं ने सैनिकों को राष्ट्रसेवा और कर्तव्यपालन की शपथ दिलाई। कमांडेंट ने सभी सैनिकों, उनके परिवारों और प्रशिक्षकों को शुभकामनाएं दीं। इसके बाद पूरा परेड मैदान जय हिंद के उद्घोष से गूंज उठा।

Updated on:
31 May 2026 10:18 pm
Published on:
31 May 2026 10:18 pm