बरेली

तीन तलाक पर काजी बोले, शरीयत में तलाक देने का अधिकार सिर्फ मर्द को

सुप्रीम कोर्ट के तीन तलाक के फैसले के बाद बरेली में काजी ने दी प्रतिक्रिया। सरकार को मामले में हस्तक्षेप का अधिकार नहीं।
2 min read
• •
Updated: 25 Aug 2017, 11:29 AM IST
 Talaq
Talaq

बरेली। तीन तलाक पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद बरेली मरकज के उलेमा ने भी अपनी प्रतिक्रिया साफ़ कर दी है। दरगाह आला हजरत से जुड़ी संस्था जमात रज़ा ए मुस्तफा के राष्ट्रीय अध्यक्ष और शहर क़ाजी असजद रज़ा खां कादरी ने बयान जारी किया है जिसमें तीन तलाक मसले पर सरकार के दखल को गलत बताया गया है। उन्होंने बयान में कहा है कि सरकार मजहबी मामलों में हस्तक्षेप नहीं कर सकती है।

हुकूमत को हस्तक्षेप का अधिकार नहीं
जमात रज़ा-ए-मुस्तफा के राष्ट्रीय महासचिव मौलाना शहाबुद्दीन रजवी ने बताया कि शहर काजी की तरफ से बयान जारी किया गया है। जिसमें शहर क़ाजी की तरफ से कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट की पांच सदस्यीय बेंच के दो जजों की राय अलग है। ऐसे में सरकार को चाहिए कि प्रजातांत्रिक मूल्यों के तहत देश में रहने वाले अलग अलग धर्म के लोगों ख़ास तौर पर अल्पसंख्यकों को जिस तरह से अपने मजहब व अक़ीदे के अनुसार जिंदगी गुजारने की आजादी दी गयी है, उसका हर तरह से ख्याल रखना चाहिए। मौलाना ने कहा कि तलाक खालिस मजहबी मामला है। शरीयत में तलाक देने का अधिकार मर्द को दिया गया है। इसलिए किसी भी हुकूमत को इसमें हस्तक्षेप करने का अधिकार नहीं है। उन्होंने कहा कि मुसलमान रोजमर्रा की जिंदगी में शरीयत पर अमल करें।


एक साथ तीन तलाक गुनाह
शहर क़ाजी ने एक साथ तीन तलाक देने को गुनाह बताया है। उन्होंने कहा कि पैगम्बर ए इस्लाम एक साथ तीन तलाक को नापसन्द करते थे और नाराजगी भी जताई थी। मर्दों को शरीयत के मुताबिक़ तलाक का तरीका अपनाने की सलाह भी दी। इससे महिलाओं के मसले हल होंगे।

देश भर के उलेमा देंगे राय
तीन तलाक मसले को लेकर उन्होंने देशभर के उलेमा के साथ मशवरा कर सरकार को रिपोर्ट देने की बात कही है। बकरीद के बाद देशभर के उलेमा की एक मीटिंग मशवरे के लिए बुलाई जा रही है। शहर काजी ने कहा है कि देशभर के उलेमा की शरई काउंसिल ऑफ इंडिया की एक बैठक जल्द बुलाई जाएगी। जिसमें तीन तलाक मसले पर उलेमा अपनी राय देंगे। उन्होंने कहा कि हुकूमत शरई कानून में मुदाखलत नहीं कर सकती है।

Published on: