शहर में अतिक्रमण की जांच ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। अब तक अवैध निर्माणों तक सीमित कार्रवाई में वे भवन भी फंस गए हैं, जिनके नक्शे विधिवत स्वीकृत थे।
बरेली। शहर में अतिक्रमण की जांच ने चौंकाने वाला मोड़ ले लिया है। अब तक अवैध निर्माणों तक सीमित कार्रवाई में वे भवन भी फंस गए हैं, जिनके नक्शे विधिवत स्वीकृत थे। कोहाड़ापीर से जीआरएम स्कूल तक की शिकायतों पर जब पुराने शहरी रिकॉर्ड और राजस्व भूचित्रों से मिलान हुआ, तो कई दुकानों और भवनों का हिस्सा सड़क की जमीन पर कब्जा करता मिला।
प्रभारी समिति की जांच में 1920-21 के शहरी अभिलेख और 1936-37 के राजस्व भूचित्रों का मिलान किया गया। इस प्रक्रिया में कई ऐसे मामले सामने आए, जहां नक्शा पास होने के बावजूद निर्माण सड़क की सीमा में पाया गया। इससे पूरे सिस्टम पर सवाल खड़े हो गए हैं।
जांच में यह भी सामने आया कि कई स्थानों पर स्वीकृत नक्शे से अधिक निर्माण किया गया है। कमर्शियल दुकानों और आवासीय भवनों में तय सीमा से आगे बढ़कर निर्माण करने के प्रमाण मिले हैं, जो सीधे तौर पर अतिक्रमण की श्रेणी में आ रहे हैं। सबसे हैरान करने वाली बात यह रही कि बरेली विकास प्राधिकरण द्वारा बेचे गए कुछ प्लॉट और दुकानों के हिस्से भी अतिक्रमण की जद में पाए गए हैं। जीआरएम स्कूल के सामने स्थित इन संपत्तियों में भी सड़क क्षेत्र पर कब्जे के संकेत मिले हैं।
सीएम ग्रिड योजना के दूसरे चरण में कोहाड़ापीर से नैनीताल रोड और पीलीभीत रोड तक कार्य प्रस्तावित है, लेकिन अतिक्रमण के कारण काम की रफ्तार धीमी पड़ गई है। प्रशासन अब इस बाधा को हटाने के लिए सख्त रुख अपनाता दिख रहा है। मामले की गंभीरता को देखते हुए 22 अप्रैल को शाम 4 बजे अपर नगर आयुक्त कार्यालय में अहम बैठक बुलाई गई है। सभी संबंधित विभागों को अभिलेखों के साथ उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं। अधिशासी अधिकारी राजीव कुमार राठी ने बताया कि बैठक के बाद अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई की रूपरेखा तय की जाएगी।