आस्था, श्रद्धा और दिव्यता का महासंगम इस बार रामनवमी पर बनने जा रहा है। 27 मार्च को ऐसा दुर्लभ योग बन रहा है, जो सालों बाद देखने को मिलता है। गजकेसरी और सुकर्मा योग के इस संयोग में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा, जिसे ज्योतिष और धर्म के जानकार बेहद फलदायी मान रहे हैं।
बरेली। आस्था, श्रद्धा और दिव्यता का महासंगम इस बार रामनवमी पर बनने जा रहा है। 27 मार्च को ऐसा दुर्लभ योग बन रहा है, जो सालों बाद देखने को मिलता है। गजकेसरी और सुकर्मा योग के इस संयोग में भगवान श्रीराम का जन्मोत्सव मनाया जाएगा, जिसे ज्योतिष और धर्म के जानकार बेहद फलदायी मान रहे हैं।
पंडित मुकेश मिश्रा के ने बताया कि 27 मार्च की सुबह 9:35 बजे तक चंद्रमा और बृहस्पति की युति से गजकेसरी योग बनेगा। यह योग जीवन में बुद्धि, सम्मान और पद की वृद्धि का संकेत देता है। मान्यता है कि इस समय की गई पूजा और संकल्प कई गुना फल देते हैं।
रामनवमी पर सुकर्मा योग पूरे दिन व्याप्त रहेगा, जिसे शुभ कार्यों की शुरुआत के लिए बेहद उत्तम माना जाता है। नई नौकरी, व्यापार या किसी बड़े फैसले के लिए यह दिन खास साबित हो सकता है। धार्मिक दृष्टि से भी यह योग विशेष फलदायी माना जाता है।
भगवान श्रीराम का जन्म अभिजीत मुहूर्त में हुआ था। इस बार भी 27 मार्च को दोपहर 12:27 बजे का समय सबसे श्रेष्ठ माना गया है। पूजा का शुभ मुहूर्त सुबह 11:13 बजे से दोपहर 1:41 बजे तक रहेगा। इस दौरान की गई पूजा विशेष फलदायी मानी जाती है।
नवमी तिथि 26 मार्च को दोपहर 11:48 बजे से शुरू होकर 27 मार्च की सुबह 10:06 बजे तक रहेगी। लेकिन उदया तिथि 27 मार्च को होने के कारण इसी दिन रामनवमी का पर्व मनाया जाएगा।
रामनवमी के दिन सुबह स्नान कर पूजा स्थल को गंगाजल से शुद्ध करें। भगवान राम की मूर्ति या चित्र पर चंदन, अक्षत, पुष्प अर्पित करें। धूप-दीप जलाकर फल-मिठाई का भोग लगाएं और राम मंत्रों का जाप करें। अंत में आरती कर भगवान से सुख-समृद्धि की कामना करें।