बरेली जंक्शन की वॉशिंग लाइन और स्टोर से अलग-अलग ट्रेनों के 142 कोचों की 1200 से अधिक बैटरियां गायब होने का मामला सामने आते ही रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया है।
बरेली। बरेली जंक्शन की वॉशिंग लाइन और स्टोर से अलग-अलग ट्रेनों के 142 कोचों की 1200 से अधिक बैटरियां गायब होने का मामला सामने आते ही रेलवे महकमे में हड़कंप मच गया है। कई दिनों तक मामला दबा रहा, लेकिन जैसे ही बात उच्च अधिकारियों तक पहुंची, उत्तर रेलवे के मुरादाबाद मंडल मुख्यालय में खलबली मच गई। मंगलवार को मंडल मुख्यालय में स्टोर इंचार्ज समेत कई अधिकारियों की पेशी हुई और जांच कमेटी गठित कर दी गई है।
बरेली जंक्शन के पूर्वी आउटर पर स्थित वॉशिंग लाइन में ट्रेनों के कोचों की मरम्मत और रखरखाव का काम होता है। यहां कोचों की तकनीकी कमियां दूर कर उन्हें प्लेटफॉर्म पर भेजा जाता है। पास में ही स्टोर है, जहां पुरानी बैटरियां और अन्य सामग्री रखी जाती है। रेलवे कोचों में बिजली आपूर्ति के लिए उपयोग होने वाली बैटरियों की कीमत काफी अधिक होती है। बैटरी, वायरिंग और करंट प्रबंधन की जिम्मेदारी इलेक्ट्रिक विभाग की होती है। आरोप है कि स्टोर और वॉशिंग लाइन से लंबे समय से बैटरियां और स्क्रैप गायब होता रहा, लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया।
हाल ही में जब स्टॉक का मिलान किया गया तो 1200 से ज्यादा बैटरियां गायब मिलीं। बताया जा रहा है कि पहले मामले को दबाने की कोशिश की गई, लेकिन बाद में रिपोर्ट दर्ज करानी पड़ी। चोरी की संख्या और नुकसान का आकलन अभी जांच का विषय है। रेलवे संपत्ति की सुरक्षा की जिम्मेदारी आरपीएफ की होती है, जबकि प्लेटफॉर्म और यात्रियों से जुड़े अपराधों के लिए जीआरपी जिम्मेदार होती है। इतने बड़े पैमाने पर बैटरियां चोरी होती रहीं और किसी को भनक तक नहीं लगी—इससे आरपीएफ की भूमिका पर सवाल उठने लगे हैं। मामले में आरपीएफ की कार्यप्रणाली की भी जांच के आदेश दिए गए हैं।
मुरादाबाद मंडल के वरिष्ठ वाणिज्य प्रबंधक (सीनियर डीसीएम) आदित्य गुप्ता ने बताया कि मामले की विभागीय जांच जारी है। इलेक्ट्रिक विभाग की ओर से आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। जांच पूरी होने से पहले बैटरियों की सटीक संख्या और नुकसान की पुष्टि करना संभव नहीं है। जांच रिपोर्ट आने के बाद आगे की कार्रवाई तय होगी।रेलवे परिसर के आसपास अस्पताल और कॉलोनी होने के बावजूद इतनी बड़ी चोरी का खुलासा होना सुरक्षा व्यवस्था पर बड़ा सवाल खड़ा कर रहा है। अब देखना होगा कि जांच कमेटी दोषियों तक पहुंचती है या मामला फाइलों में सिमटकर रह जाता है।