बरेली

स्वतंत्र गवाह नहीं, विवेचना भी कमजोर… 17 साल पुराने हत्या व गैंगस्टर केस में तीन आरोपी बरी

17 साल पुराने हत्या और गैंगस्टर एक्ट के मामले में अदालत ने पुलिस की विवेचना और साक्ष्यों पर सवाल उठाते हुए तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष जज गैंगस्टर एक्ट तबरेज अहमद की अदालत ने भोजीपुरा थाना क्षेत्र के गांव रम्पुरा माफी निवासी हसीन, जाहिद खां और सखावत उर्फ हिप्पी को सात मार्च को बरी करने का आदेश दिया।

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Mar 11, 2026

बरेली। 17 साल पुराने हत्या और गैंगस्टर एक्ट के मामले में अदालत ने पुलिस की विवेचना और साक्ष्यों पर सवाल उठाते हुए तीन आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया। अपर सत्र न्यायाधीश/विशेष जज गैंगस्टर एक्ट तबरेज अहमद की अदालत ने भोजीपुरा थाना क्षेत्र के गांव रम्पुरा माफी निवासी हसीन, जाहिद खां और सखावत उर्फ हिप्पी को सात मार्च को बरी करने का आदेश दिया। अदालत ने माना कि मामले में स्वतंत्र गवाह पेश नहीं किए गए और गैंगचार्ट जारी करने में भी उचित विवेक का इस्तेमाल नहीं किया गया।

रात तीन बजे घर में घुसकर हमला, पिता की गोली मारकर हत्या

थाना हाफिजगंज निवासी शकील उर्फ पप्पू ने सात अप्रैल 2008 को पुलिस में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उसने बताया था कि वह पत्नी फरजाना और बच्चों के साथ घर में सो रहा था। रात करीब तीन बजे चार लोग घर में घुस आए और उसके साथ मारपीट करने लगे। शोर सुनकर उसके पिता लाठी लेकर दूसरे मकान से आए और हमलावरों को ललकारा। आरोप था कि इस दौरान हमलावरों ने उसके पिता को गोली मार दी, जिससे उनकी मौके पर ही मौत हो गई।

गिरफ्तारी के बाद पुलिस ने दाखिल की थी चार्जशीट

मामले की जांच विवेचक यतींद्र बाबू भारद्वाज ने की थी। जांच के दौरान पुलिस ने हसीन को 19 अप्रैल 2008 को गिरफ्तार किया। पूछताछ में उसने जाहिद खां और सखावत उर्फ हिप्पी के नाम बताए। इसके बाद तीन मई को पुलिस ने सखावत को तमंचे के साथ गिरफ्तार किया। पुलिस ने तीनों के खिलाफ हत्या और गैंगस्टर एक्ट की धाराओं में आरोपपत्र अदालत में दाखिल कर दिया।

गवाहों ने अदालत में पहचानने से किया इनकार

मुकदमे की सुनवाई के दौरान मामला कमजोर पड़ गया। वादी शकील उर्फ पप्पू समेत तीन गवाहों ने अदालत में आरोपियों को पहचानने से इनकार कर दिया। गवाहों ने यह भी कहा कि आरोपी घटना में शामिल नहीं थे। इसके बाद अभियोजन पक्ष का मामला कमजोर हो गया।

कोर्ट की टिप्पणी: विवेचना में स्वतंत्र साक्ष्य नहीं

अदालत ने अपने फैसले में कहा कि विवेचक ने ऐसा कोई ठोस साक्ष्य एकत्र नहीं किया जिससे यह साबित हो सके कि आरोपी गिरोह बनाकर अपराध करते थे। केस डायरी में स्वतंत्र गवाहों का भी अभाव रहा। अदालत ने यह भी कहा कि पत्रावली में ऐसा कोई साक्ष्य नहीं है जिससे यह स्पष्ट हो कि जिलाधिकारी और वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक ने संयुक्त बैठक कर गैंगचार्ट को अनुमोदित किया हो। इन कमियों के चलते अदालत ने तीनों आरोपियों को दोषमुक्त कर दिया।

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