बरेली

डंपिंग यार्ड से मिलेगी राहत, सथरापुर वेस्ट प्लांट बनेगा गेमचेंजर… 15 अप्रैल से पहले ट्रायल की तैयारी

शहरवासियों के लिए राहत की बड़ी खबर है। अब सड़कों और डंपिंग यार्डों में लगे कूड़े के ढेर जल्द ही इतिहास बन सकते हैं।

2 min read
Apr 12, 2026

बरेली। शहरवासियों के लिए राहत की बड़ी खबर है। अब सड़कों और डंपिंग यार्डों में लगे कूड़े के ढेर जल्द ही इतिहास बन सकते हैं। नगर निगम ने शहर के 80 वार्डों से निकलने वाले करीब 500 मीट्रिक टन कचरे के वैज्ञानिक निस्तारण के लिए सथरापुर में सॉलिड वेस्ट मैनेजमेंट प्लांट का निर्माण तेज कर दिया है। अधिकारियों का दावा है कि मशीनों का इंस्टॉलेशन अंतिम चरण में है और जल्द ही ट्रायल शुरू होगा।

जीरो वेस्ट मॉडल पर चलेगा प्लांट

नगर निगम ने इस महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए दिल्ली की संस्था पीपुल्स एसोसिएशन फॉर टोटल हेल्प एप्लूज (पाथ्या) को जिम्मेदारी सौंपी है। मौके पर मशीनें पहुंच चुकी हैं और तेजी से फिटिंग का काम चल रहा है। पर्यावरण अभियंता राजीव कुमार राठी के मुताबिक यह प्लांट जीरो वेस्ट मैनेजमेंट सिद्धांत पर आधारित होगा, जिसमें कचरे का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित किया जाएगा। निगम कार्यदायी संस्था को प्रति टन 446 रुपये का भुगतान करेगा।

गीले कूड़े से बनेगी गैस, खाद और सीएनजी

योजना के तहत शहर में डोर-टू-डोर कलेक्शन के जरिए गीला और सूखा कचरा अलग-अलग इकट्ठा किया जाएगा। गीले कूड़े से बायोगैस, सीएनजी और जैविक खाद तैयार की जाएगी, जबकि सूखे कचरे का रीसाइक्लिंग किया जाएगा। इससे न सिर्फ शहर साफ होगा, बल्कि आय के नए स्रोत भी तैयार होंगे। प्लांट पूरी तरह चालू होने के बाद सफाई व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिलेगा।

स्वच्छता रैंकिंग में सुधार की उम्मीद

यह प्लांट शहर की स्वच्छता रैंकिंग सुधारने में भी अहम भूमिका निभाएगा। पिछले साल स्वच्छता सर्वेक्षण में बरेली को अपेक्षित स्थान नहीं मिल सका था। इसकी सबसे बड़ी वजह लीगेसी वेस्ट यानी पुराने कूड़े के ढेरों का निस्तारण न होना और प्रोसेसिंग यूनिट की कमी थी। अब 15 अप्रैल के बाद केंद्रीय टीम के संभावित दौरे को देखते हुए नगर निगम ने तैयारियां तेज कर दी हैं। कचरे के पृथक्करण और प्रोसेसिंग की व्यवस्था मजबूत कर इस बार रैंकिंग में लंबी छलांग लगाने की रणनीति पर काम किया जा रहा है।

Also Read
View All