समाज की बंदिशों और धर्म की दीवारों को धता बताते हुए बिजनौर की मुस्कान खान और बरेली के कुनाल ने अपने प्यार को मुकाम दे दिया।
बरेली। समाज की बंदिशों और धर्म की दीवारों को धता बताते हुए बिजनौर की मुस्कान खान और बरेली के कुनाल ने अपने प्यार को मुकाम दे दिया। अलग-अलग मजहब से ताल्लुक रखने वाले इस जोड़े ने तमाम विरोधों के बावजूद साथ जीने का फैसला किया और आखिरकार शादी के बंधन में बंध गए।
बिजनौर के नजीबाबाद की रहने वाली मुस्कान खान ने अपने प्रेमी कुनाल के साथ जिंदगी बिताने के लिए बड़ा कदम उठाया। परिवार की असहमति के बावजूद मुस्कान ने न सिर्फ अपने रिश्ते को चुना, बल्कि स्वेच्छा से हिंदू धर्म भी अपना लिया। मुस्कान का कहना है कि उनका झुकाव शुरू से ही राधा-कृष्ण की भक्ति की ओर रहा है, जो समय के साथ और गहरा होता चला गया।
बरेली के अगस्त्य मुनि आश्रम में दोनों का विवाह पूरे विधि-विधान के साथ संपन्न हुआ। आश्रम के आचार्य पंडित केके शंखधार ने पहले मुस्कान का शुद्धिकरण कराया, जिसके बाद वैदिक मंत्रोच्चार के बीच अग्नि को साक्षी मानकर दोनों ने सात फेरे लिए। इस दौरान उन्होंने जन्म-जन्मांतर तक साथ निभाने की कसमें खाईं। मुस्कान ने साफ कहा कि उन्होंने यह फैसला पूरी तरह अपनी इच्छा से लिया है। उनका कहना है कि उन्हें सनातन परंपराओं में आस्था है और अब वह पति कुनाल के साथ मंदिरों के दर्शन करने जाएंगी। शादी के बाद दोनों के चेहरे पर खुशी साफ झलक रही थी।
इस शादी के बाद विवाह कराने वाले पंडित केके शंखधार एक बार फिर सुर्खियों में आ गए हैं। बताया जा रहा है कि वे इससे पहले भी कई अंतरधार्मिक विवाह करवा चुके हैं और अब तक करीब 125 मुस्लिम युवतियों की शादी करवा चुके हैं। मुस्कान और कुनाल की यह कहानी एक बार फिर यह साबित करती है कि जब इरादे मजबूत हों, तो समाज की दीवारें भी छोटी पड़ जाती हैं। प्यार न धर्म देखता है, न सरहद—और यही इस रिश्ते की सबसे बड़ी ताकत बनकर सामने आया है।