महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शैक्षणिक और शोध क्षमता का जोरदार प्रदर्शन किया है। प्रतिष्ठित साइमागो संस्थान रैंकिंग-2026 में विश्वविद्यालय को उत्तर प्रदेश में पांचवां स्थान, देश में 274वां स्थान और विश्व स्तर पर 8813वीं रैंक प्राप्त हुई है।
बरेली। महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अपनी शैक्षणिक और शोध क्षमता का जोरदार प्रदर्शन किया है। प्रतिष्ठित साइमागो संस्थान रैंकिंग-2026 में विश्वविद्यालय को उत्तर प्रदेश में पांचवां स्थान, देश में 274वां स्थान और विश्व स्तर पर 8813वीं रैंक प्राप्त हुई है। इस उपलब्धि से विश्वविद्यालय परिसर में उत्साह का माहौल है और इसे पूरे रोहिलखंड क्षेत्र के लिए बड़ी उपलब्धि माना जा रहा है।
रैंकिंग के प्रतिशतांक आंकड़े विश्वविद्यालय की बढ़ती शैक्षणिक ताकत को दर्शाते हैं। समग्र प्रदर्शन में विश्वविद्यालय को 82वां प्रतिशतांक मिला है। यह उपलब्धि बताती है कि संस्थान की शिक्षण व्यवस्था, शोध गतिविधियां और अकादमिक माहौल लगातार मजबूत हो रहा है। वहीं शोध के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने 71वां प्रतिशतांक हासिल किया है। इसका अर्थ है कि शोध पत्रों के प्रकाशन, संदर्भ प्रभाव और अकादमिक उत्पादकता के मामले में विश्वविद्यालय लगातार प्रगति कर रहा है।
नवाचार के क्षेत्र में विश्वविद्यालय ने सबसे प्रभावशाली प्रदर्शन किया है। इस श्रेणी में संस्थान को 89वां प्रतिशतांक मिला है। यह उपलब्धि पेटेंट, तकनीकी हस्तांतरण, उद्योगों के साथ सहयोग और अनुप्रयुक्त शोध गतिविधियों में विश्वविद्यालय के बढ़ते योगदान को दर्शाती है। इसके अलावा सामाजिक प्रभाव के क्षेत्र में विश्वविद्यालय को 59वां प्रतिशतांक प्राप्त हुआ है। यह दर्शाता है कि संस्थान सामुदायिक कार्यक्रमों, जनजागरूकता अभियानों और सामाजिक सहभागिता के माध्यम से समाज के साथ सक्रिय रूप से जुड़ा हुआ है।
साइमागो संस्थान रैंकिंग विश्वभर के शैक्षणिक और शोध संस्थानों का मूल्यांकन तीन प्रमुख मानकों पर करती है। इसमें शोध को 50 प्रतिशत, नवाचार को 30 प्रतिशत और सामाजिक प्रभाव को 20 प्रतिशत महत्व दिया जाता है। यह मूल्यांकन अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त आंकड़ों और वेब प्रदर्शन संकेतकों के आधार पर किया जाता है।
इस उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति प्रोफेसर के.पी. सिंह ने प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह सफलता शिक्षकों, शोधार्थियों, विद्यार्थियों और कर्मचारियों के सामूहिक प्रयास का परिणाम है। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय में शोध की गुणवत्ता बढ़ाने, अंतर्विषयक सहयोग को मजबूत करने और नवाचार आधारित वातावरण विकसित करने के लिए लगातार प्रयास किए जा रहे हैं।